राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत संचालित उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम ने छत्तीसगढ़ में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। 7 दिसंबर 2025 को आयोजित महापरीक्षा अभियान के परिणामों में प्रदेश ने 90.85 प्रतिशत का उत्कृष्ट प्रदर्शन दर्ज किया।

राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अनुसार 4,55,044 शिक्षार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया, जिनमें से 4,13,403 प्रतिभागी सफल घोषित हुए। पुरुष वर्ग में 1,23,743 और महिला वर्ग में 2,89,597 अभ्यर्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की। ट्रांसजेंडर वर्ग के 63 शिक्षार्थियों की सफलता ने समावेशी शिक्षा की दिशा में मजबूत संदेश दिया।

इस बार अभियान की सबसे विशेष उपलब्धि बस्तर संभाग से रही, जहां 984 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने शिक्षा के माध्यम से नई जिंदगी की शुरुआत की। वहीं प्रदेश की जेलों से लगभग 795 बंदियों ने भी परीक्षा देकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प व्यक्त किया।

98 वर्षीय दुधी बाई सहित अनेक वरिष्ठ नागरिकों ने परीक्षा देकर यह साबित किया कि शिक्षा के लिए उम्र बाधा नहीं है। कई स्थानों पर परिवार की तीन पीढ़ियों ने एक साथ परीक्षा में भाग लिया, जबकि दिव्यांग प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता भी प्रेरणादायक रही।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मार्च में प्रस्तावित अगले परीक्षा अभियान में अधिकाधिक भागीदारी की अपील की। उन्होंने छत्तीसगढ़ को पूर्ण साक्षर राज्य बनाने के लिए सामूहिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।