भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को लेकर चीन द्वारा मध्यस्थता किए जाने के दावे ने देश की राजनीति और कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि यह मामला सीधे तौर पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ा हुआ है, जिस पर सरकार की चुप्पी चिंता बढ़ाती है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि वे इस संवेदनशील विषय पर अपनी चुप्पी तोड़ें और देश को सच्चाई से अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि भारत की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर किन परिस्थितियों में चीन इस तरह के दावे कर रहा है और सरकार की आधिकारिक स्थिति क्या है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने बयान में कहा कि इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी 10 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने में हस्तक्षेप का दावा कर चुके हैं। उन्होंने यह बात अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार दोहराई, लेकिन प्रधानमंत्री की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई। अब चीनी विदेश मंत्री द्वारा इसी तरह का दावा किया जाना स्थिति को और भी गंभीर बना देता है।

कांग्रेस नेता ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि 4 जुलाई 2025 को सेना के उप प्रमुख राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत को चीन की ओर से प्रत्यक्ष रणनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ा था। ऐसे में पाकिस्तान के साथ खड़े चीन द्वारा मध्यस्थता का दावा कई सवाल खड़े करता है।

कांग्रेस का कहना है कि यह दावा न केवल जनता को दिए गए भरोसे के विपरीत है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भ्रम पैदा करता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि 19 जून 2020 को चीन को लेकर दिए गए प्रधानमंत्री के बयान से भारत की कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई है, जिसका असर आज बढ़ते व्यापार घाटे और आयात पर निर्भरता के रूप में दिखाई दे रहा है।

दूसरी ओर, भारत सरकार का आधिकारिक रुख लगातार यही रहा है कि 7 से 10 मई के बीच उत्पन्न स्थिति भारत और पाकिस्तान के बीच DGMO स्तर की सीधी बातचीत के माध्यम से सुलझाई गई थी। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि भारत-पाक मामलों में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की कोई भूमिका नहीं है।

यह विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति की पारदर्शिता और राष्ट्रीय हितों से जुड़ा एक अहम मुद्दा बन चुका है।