दुर्ग। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर वाट्सएप यूनिवर्सिटी में फैलाई जा रही भ्रामक बातों को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वाट्सएप यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ही गलत बात करते हैं, तो समझ लीजिए उनके छात्र किस तरह की बातें करेंगे।
बीजेपी पर निशाना साधते हुए सीएम ने कहा कि चर्चा आज भी गांधी, नेहरू और पटेल की होती है, सावरकर की नहीं होती है। सावरकर ने ही दो राष्ट्र की बात कही, लेकिन आरोप आज हमपर लगते हैं। देश की रक्षा के लिए तो गांधी जी, इंदिरा जी और राजीव जी ने जान दी है। इन्होंने तो अपना नाखून तक नहीं कटवाया। विदेश नीति की बात करते हैं, लेकिन आफगानिस्तान में जो हुआ उसके बारे में प्रधानमंत्री ने कुछ क्यों नहीं कहा। क्या नेहरू जी रहते तो चुप रहते, नहीं रहते। भिलाई स्टील प्लांट नेहरू जी की कृति है।
भिलाई शहर नहीं विचार है- सीएम
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू के सपनों को समझना है और उनके विचारों की झलक चाहिए तो हमें भिलाई को देखना होगा। भिलाई शहर नहीं, विचार है। नेहरू ने जिस नेशन स्टेट की कल्पना की थी, वो भिलाई में मूर्त रूप में दिखता है। भारत का कोई भी जिला ऐसा नहीं होगा जिसका बाशिंदा भिलाई में नहीं रहता होगा।
वाट्सएप यूनिवर्सिटी द्वारा फैलाई जा रही भ्रांतियां- सीएम
इस अवसर पर प्रमुख वक्ता आलोचक एवं विद्वान डॉ. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि नेहरू के बारे में बहुत सी भ्रांतियां वाट्सएप यूनिवर्सिटी द्वारा फैलाई गई हैं। उन पर आरोप लगता है कि भारतीय संस्कृति से अछूते हैं, विदेशी विचारों के करीब है। हकीकत ये है कि उन्होंने अपनी प्रसिद्ध किताब डिस्कवरी आफ इंडिया की शुरूआत नासदीय सूक्त से की थी। नासदीय सूक्त कहता है कि किसने सृष्टि को बनाया यह नहीं मालूम, हम कभी यह नहीं पता कर सकते कि अंतिम सत्य क्या है। इसलिए किसी एक विचार को या एक सोच को अंतिम सत्य मानकर खोज की उत्सुकता समाप्त करना सही नहीं है। नेहरू ने अपनी राह अलग चली।
गांधी और नेहरू में कभी मनभेद नहीं हुआ- सीएम
गांधी जी बीस के दशक में डोमिनियन स्टेटस के लिए संघर्ष कर रहे थे। नेहरू ने कहा कि पूर्ण स्वराज से नीचे कुछ नहीं और गांधी जी भी उनसे सहमत हुए। गांधी और नेहरू की विचारधारा अलग थी लेकिन कभी भी दोनों के बीच मनभेद नहीं हुआ। सुभाषचंद्र बोस को लें, कुछ लोग वाटसएप यूनिवर्सिटी में कहते हैं कि सुभाष बोस ने आजाद हिंद फौज सावरकर के कहने पर बनाई। यदि ऐसा ही था तो उन्होंने अपनी ब्रिगेड का नाम सावरकर के नाम पर क्यों नहीं रखा। उन्होंने गांधी, नेहरू, आजाद के नाम पर ब्रिगेड रखे पर सावरकर के नाम पर ब्रिगेड नहीं रखा।
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