साइबर जागरूकता, छत्तीसगढ़ पुलिस, विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ में साइबर जागृति अभियान के जरिए डिजिटल सुरक्षा का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे निरंतर जारी रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए जनता की भागीदारी जरूरी है। पुलिस, प्रशासन और नागरिकों को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा।

रायपुर में 9 अक्टूबर को साइबर जागरूकता और ट्रैफिक हैकाथॉन के प्रतिभागियों का सम्मान हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं के नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उपयोगी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

सात सप्ताह में 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा संदेश

छत्तीसगढ़ पुलिस ने 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक विशेष अभियान चलाया। इसमें प्रदेश की 34 पुलिस इकाइयों ने समन्वय के साथ काम किया। सात सप्ताह के दौरान पांच लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। पांच लाख से अधिक सेल्फी के जरिए भी नागरिकों की भागीदारी दर्ज हुई।

अभियान का उद्देश्य गांवों, शहरों और शैक्षणिक संस्थानों तक साइबर सुरक्षा की जानकारी पहुंचाना था। इसके तहत डिजिटल भुगतान, यूपीआई सुरक्षा और डेटा गोपनीयता पर जागरूकता बढ़ाई गई। महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा और फर्जी रोजगार प्रस्तावों पर भी जानकारी दी गई।

ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां

डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते उपयोग के साथ सतर्क रहना जरूरी है। ठग लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाते हैं। इसलिए अनजान संदेशों और फोन कॉल पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।

  • अपना ओटीपी, पासवर्ड या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें।
  • संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और अनजान ऐप डाउनलोड करने से बचें।
  • फर्जी निवेश योजनाओं और नौकरी के झूठे प्रस्तावों की जांच करें।
  • डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धमकी देने वालों से सावधान रहें।
  • साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।

सोशल मीडिया से भी बढ़ी साइबर जागरूकता

साइबर जागृति अभियान के संदेश सोशल मीडिया पर भी साझा किए गए। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और व्हाट्सऐप का उपयोग किया गया। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी आई4सी ने भी सहयोग दिया।

अभियान के दौरान 3,100 से अधिक पोस्ट साझा की गईं। इन पोस्ट को 6.02 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिले। इससे साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंची।

जिलों की पहल बनी जनभागीदारी का उदाहरण

अलग-अलग जिलों ने स्थानीय जरूरतों के अनुसार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। मुंगेली में ग्राम सभाओं के जरिए लगभग 15 हजार ग्रामीणों तक संदेश पहुंचा। गरियाबंद में महिला कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों को जागरूक किया गया।

दुर्ग में विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को जानकारी दी। रायपुर में साइबर जागरूकता पर लघु फिल्म प्रतियोगिता आयोजित हुई। जांजगीर-चांपा में राखी के जरिए सुरक्षा संदेश फैलाया गया। बिलासपुर में रेडियो कार्यक्रम के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया गया।

इन पहलों ने साइबर जागरूकता को समुदायों तक पहुंचाने में मदद की। समारोह में अभिनव प्रयास करने वाले जिलों को सम्मानित किया गया।

ट्रैफिक हैकाथॉन में सामने आए नए समाधान

कार्यक्रम में ट्रैफिक हैकाथॉन के प्रतिभागियों को भी सम्मान मिला। विजेता कार्तिकेय पंत ने शंकर नगर टर्निंग पॉइंट के लिए यातायात सुधार का मॉडल प्रस्तुत किया। उनके सुझावों में सड़क क्षेत्र का बेहतर उपयोग और स्पष्ट लेन मार्किंग शामिल थी।

अन्य प्रतिभागियों ने टाटीबंध, तेलीबांधा, आमापारा और लोधीपारा जैसे क्षेत्रों की समस्याओं पर विचार किया। उन्होंने पार्किंग, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और यातायात जाम कम करने के सुझाव दिए।

कुछ प्रस्तावों में एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और सीसीटीवी आधारित निगरानी की अवधारणाएं भी शामिल थीं। इनसे नियमों के उल्लंघन की पहचान और जाम की पूर्व सूचना देने में मदद मिल सकती है। एम्बुलेंस तथा अग्निशमन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने के सुझाव भी दिए गए।

ग्रामीण परिवहन को मजबूत करने पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा का भी उल्लेख किया। इस सेवा से दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे मार्गों पर 100 से अधिक बसें संचालित हो रही हैं, जहां पहले सेवाएं सीमित थीं। इससे ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, सरकार ने डिजिटल सुरक्षा और यातायात सुधार में जनभागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। साइबर जागरूकता के प्रयास आगे भी जारी रखने पर जोर दिया गया। नागरिकों की सतर्कता और समय पर शिकायत साइबर ठगी से बचाव में अहम भूमिका निभा सकती है।



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