दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को एक और अहम सुराग मिला है। अधिकारियों के अनुसार, जम्मू के मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने वाले कश्मीरी डॉक्टरों को जैश-ए-मोहम्मद ने सुनियोजित तरीके से ब्रेनवॉश किया और इसी के आधार पर एक सफेदपोश आतंकी नेटवर्क खड़ा किया गया।
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि अब तक पकड़े गए सभी संदिग्ध किसी न किसी रूप में उसी मेडिकल कॉलेज से जुड़े रहे हैं।

सूत्रों ने बताया कि डॉक्टर बनने के बाद ये युवा देशभर के अलग-अलग शहरों में नौकरी करने लगे। अपने सामाजिक दर्जे का फायदा उठाते हुए इन्होंने बिना शक उत्पन्न किए आतंकी मॉड्यूल के लिए नए लोगों की भर्ती शुरू कर दी।
इन्हें बार-बार वे वीडियो दिखाए गए जिनमें विशेष समुदाय के लोगों पर हुए कथित अत्याचारों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया था।
इन्हीं वीडियो के सहारे इन युवाओं की सोच को बदला गया, और उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि वे “कौम की रक्षा” के लिए काम कर रहे हैं।

जैश-ए-मोहम्मद ने इस मॉड्यूल को ‘सफेदपोश’ इसलिए कहा क्योंकि इसमें शामिल लोग डॉक्टर जैसे सम्मानित पेशे से जुड़े थे, जिससे उन्हें शक की नजर से देखना मुश्किल था।
जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की फंडिंग, संरचना और भर्ती प्रक्रिया को खंगाल रही हैं ताकि पूरे तंत्र को पूरी तरह खत्म किया जा सके।