बालकनी की रेलिंग पर टंगा पुरानी बोतल से बना DIY बर्ड फीडर और पास में पानी का सकोरा

देश में 2 से 8 अक्टूबर तक वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है. इस मौके पर घर से ही एक छोटी शुरुआत की जा सकती है. पुरानी प्लास्टिक बोतल से DIY बर्ड फीडर और मिट्टी के सकोरे से पानी का बर्तन बनाइए. यहां सामान, स्टेप और सुरक्षा के नियम एक साथ दिए गए हैं.

DIY बर्ड फीडर बनाने में कितना समय और खर्च लगता है

एक साधारण DIY बर्ड फीडर घर में पड़ी चीजों से करीब आधे घंटे में बन जाता है. इसके लिए एक खाली बोतल, दो लकड़ी की चम्मच या डंडियां और मजबूत धागा काफी है. पानी के लिए मिट्टी का चौड़ा सकोरा ठीक रहता है. असली मेहनत बाद में है, यानी रोज पानी बदलना और हर हफ्ते सफाई करना.

बालकनी स्टेशन के लिए सामान की सूची

  • एक साफ, सूखी 1 या 2 लीटर की प्लास्टिक बोतल, ढक्कन समेत.
  • दो लकड़ी की चम्मच या आइसक्रीम स्टिक, बैठने की जगह के लिए.
  • नायलॉन की रस्सी या मजबूत सुतली, कैंची और एक कील.
  • मिट्टी का उथला सकोरा या चौड़ी तश्तरी.
  • बिना नमक वाले साबुत दाने, जैसे बाजरा या सूरजमुखी के बीज.

बोतल से फीडर बनाने के आसान स्टेप

सबसे पहले बोतल को धोकर पूरी तरह सुखा लें. दरअसल गीली बोतल में दाने जल्दी सड़ते हैं. ऑडुबॉन की गाइड के मुताबिक नमी वाले दानों पर फफूंद लग सकती है, जो पक्षियों के लिए खतरनाक है.

इसके बाद बोतल के निचले हिस्से से करीब 5 सेंटीमीटर ऊपर गर्म कील से आमने-सामने दो छेद करें. फिर एक चम्मच इन छेदों से आर-पार निकाल दें. ध्यान रहे कि चम्मच का गोल हिस्सा बाहर की तरफ रहे.

अब चम्मच के गोल हिस्से के ठीक ऊपर बोतल में एक छोटा छेद और बढ़ा दें. यहीं से दाना धीरे-धीरे चम्मच पर गिरेगा. इसी तरह 5-6 सेंटीमीटर ऊपर दूसरी चम्मच भी लगा सकते हैं.

आखिर में ढक्कन में छेद करके रस्सी पिरो दें और अंदर गांठ लगा दें. फिर कीप की मदद से दाना भरें. ऐसे में आपका DIY बर्ड फीडर टांगने के लिए तैयार है.

मिट्टी के सकोरे से पानी का बर्तन

पानी के लिए बहुत गहरा बर्तन न लें. उथला सकोरा छोटे पक्षियों के लिए आसान रहता है. चाहें तो बीच में एक साफ पत्थर रख दें, ताकि छोटी चिड़िया उस पर बैठकर पानी पी सके.

इसके अलावा सकोरे को रस्सी के झूले में टांग सकते हैं या बालकनी की दीवार पर रख सकते हैं. ब्रिटेन की पक्षी संस्था आरएसपीबी की सलाह साफ है. पानी हर दिन बदलें. अगर रोज बदलना संभव न हो, तो पानी रखें ही नहीं.

फीडर कहां टांगें ताकि पक्षी सुरक्षित रहें

जगह चुनना बनाने से भी ज्यादा जरूरी है. आरएसपीबी के मुताबिक फीडर इतनी ऊंचाई पर हो कि बिल्ली जैसे जानवर उस तक न पहुंच सकें. साथ ही उसे ऐसी जगह के नीचे न टांगें, जहां पक्षी बैठते हों. वरना बीट दाने में गिरती है.

वहीं खिड़की के शीशे से टकराने का खतरा भी होता है. ऑडुबॉन की गाइड कहती है कि फीडर खिड़की से तीन फीट से कम या 30 फीट से ज्यादा दूरी पर हो. बालकनी में आमतौर पर पहला विकल्प ही आसान है.

DIY बर्ड फीडर में क्या डालें और क्या नहीं

दानों में सादगी रखें. बिना नमक और बिना मसाले वाले साबुत दाने ही डालें. हालांकि रसोई का बचा खाना डालने की आदत कई घरों में होती है.

आरएसपीबी के मुताबिक नमक वाली चीजें पक्षियों में पानी की कमी करती हैं. इसलिए नमकीन, भुजिया या तली चीजें न डालें. साथ ही पका खाना चूहों को बुला सकता है.

ब्रेड भी अच्छा विकल्प नहीं है. ऑडुबॉन के एक लेख के मुताबिक इसमें पक्षियों के लिए जरूरी पोषण नहीं होता. वहीं आरएसपीबी चेताती है कि प्रजनन के मौसम में सूखी, सख्त चीजें चूजों के गले में अटक सकती हैं.

हर हफ्ते का सफाई रूटीन

आरएसपीबी की सलाह है कि फीडर और पानी का बर्तन हफ्ते में कम से कम एक बार धोएं. इसके लिए गर्म साबुन वाला पानी इस्तेमाल करें. फिर अच्छी तरह धोकर सुखाएं और उसके बाद ही दोबारा दाना भरें.

इसके अलावा फीडर के नीचे गिरे दाने और बीट भी साफ करते रहें. यही नहीं, एक बार में ज्यादा दाना न भरें. उतना ही डालें, जितना एक-दो दिन में खत्म हो जाए.

वन्यजीव सप्ताह में बच्चों के साथ करें यह प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट बच्चों के साथ करने के लिए भी अच्छा है. हालांकि कील गर्म करने और छेद करने का काम बड़े खुद करें. वहीं बच्चे बोतल सजा सकते हैं और रोज पानी बदलने की जिम्मेदारी ले सकते हैं. इसके अलावा वे एक कॉपी में लिख सकते हैं कि कौन सा पक्षी कब आया.

DIY बर्ड फीडर से जुड़े आम सवाल

पहले दिन से पक्षी क्यों नहीं आ रहे?

नई चीज पर भरोसा बनने में समय लगता है. इसलिए कुछ दिन इंतजार करें और फीडर की जगह बार-बार न बदलें.

क्या प्लास्टिक की जगह कुछ और इस्तेमाल हो सकता है?

हां, पुराना नारियल का खोल या मिट्टी का छोटा कुल्हड़ भी टांगा जा सकता है. बस उसमें पानी न रुके और उसे साफ करना आसान हो.

नोट: यहां दी गई सलाह आरएसपीबी और ऑडुबॉन जैसी पक्षी संस्थाओं की सामान्य गाइडलाइन पर आधारित है. किसी घायल या बीमार पक्षी को देखें तो खुद इलाज करने के बजाय स्थानीय वन विभाग या पशु बचाव संस्था से संपर्क करें. जानकारी समय के साथ बदल सकती है.

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