रायपुर के ऐतिहासिक डब्ल्यूआरएस मैदान में दशहरा रावण दहन का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया। इस दौरान हजारों लोग मौजूद रहे। मैदान में प्रभु श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। सीएम साय ने कहा कि यह पर्व सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
दशहरा रावण दहन से मिलता है सत्य और धर्म का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव नहीं है। यह पर्व मानवता और सदाचार के मूल्यों को अपनाने का संदेश भी देता है। भगवान श्रीराम का जीवन कठिन परिस्थितियों में भी धर्म के मार्ग पर चलना सिखाता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में सही और गलत के बीच चुनाव करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में सत्य और न्याय का साथ देना चाहिए। हमारे फैसले ही चरित्र और संस्कारों की पहचान बनते हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, विजयादशमी भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व लोगों को परंपराओं से जोड़ता है। साथ ही, नई पीढ़ी को नैतिक मूल्यों की सीख देता है।
डब्ल्यूआरएस मैदान में पांच दशकों से जारी है परंपरा
रायपुर का डब्ल्यूआरएस मैदान लंबे समय से दशहरा उत्सव का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां पांच दशकों से अधिक समय से रावण दहन की परंपरा निभाई जा रही है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल होते हैं।
इस परंपरा के जरिए अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखते हैं। ये आने वाली पीढ़ियों को भारतीय जीवन मूल्यों से परिचित कराते हैं।
भगवान श्रीराम से छत्तीसगढ़ का गहरा संबंध
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ और भगवान श्रीराम के आत्मीय संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने माता सीता और लक्ष्मण के साथ छत्तीसगढ़ के वनांचलों में समय बिताया था। इसलिए प्रदेश की लोकआस्था और संस्कृति में भगवान श्रीराम का विशेष स्थान है।
उनका जीवन त्याग, धैर्य, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है। कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना उनके जीवन की प्रमुख सीख है।
आतंकवाद और माओवाद के विरुद्ध कार्रवाई का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आतंकवाद और माओवाद के विरुद्ध कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के खिलाफ भारत ने दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई है। साथ ही, छत्तीसगढ़ में माओवाद के विरुद्ध अभियान को गति मिली है।
उन्होंने शांति, सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव के महत्व पर जोर दिया। उनके अनुसार, सत्य, न्याय और मानवता के मूल्य समाज को मजबूत बनाते हैं।
श्रीरामलला दर्शन योजना से 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को लाभ
मुख्यमंत्री ने श्रीरामलला दर्शन योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम में दर्शन का अवसर मिला है।
यह योजना श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्रा का अवसर उपलब्ध कराने से जुड़ी है। भगवान श्रीराम के दर्शन अनेक श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
विजयादशमी आयोजन की प्रमुख बातें
- रावण दहन: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डब्ल्यूआरएस मैदान में तीनों पुतलों का दहन किया।
- पर्व का संदेश: सत्य, धर्म, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई।
- छत्तीसगढ़ का संबंध: मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम और माता कौशल्या से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख किया।
- रामलला दर्शन: राज्य के 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या में दर्शन का अवसर मिलने की जानकारी दी गई।
विजयादशमी हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है
दशहरा हमें अपने विचारों और व्यवहार में अच्छाई अपनाने की सीख देता है। यह पर्व याद दिलाता है कि कठिनाइयों के बावजूद सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। समाज में एकता और सद्भाव बनाए रखना भी जरूरी है।
दशहरा रावण दहन का आयोजन इसी सांस्कृतिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों का अनुसरण सत्य, न्याय और मानवता के पक्ष में खड़े रहने से होता है।
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