रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने E-20 इंजन विवाद से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने माना कि संबंधित कार का इंजन E-20 ईंधन के अनुरूप नहीं था। इसी कारण वाहन में बार-बार तकनीकी खराबी आती रही। आयोग ने कार निर्माता और डीलर को 45 दिनों के भीतर नई E-20 कम्पैटिबल कार देने या लगभग ₹21.60 लाख का भुगतान करने का आदेश दिया है।
मुख्य बातें
- रायपुर उपभोक्ता आयोग ने डॉक्टर के पक्ष में फैसला सुनाया।
- नई E-20 कम्पैटिबल कार देने के निर्देश।
- वैकल्पिक रूप से ₹20.50 लाख की राशि लौटाने का आदेश।
- मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹1 लाख का मुआवजा।
- आदेश का पालन 45 दिनों में करना होगा।
- देरी होने पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
E-20 इंजन विवाद में कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
रायपुर के सड्डू निवासी डॉ. प्रेमराज डेब्टा ने जून 2024 में ग्रैंड विटारा कार खरीदी थी। कुछ महीनों बाद वाहन में बार-बार तकनीकी खराबी आने लगी। अधिकृत सर्विस सेंटर ने शुरुआत में ईंधन को समस्या का कारण बताया।
कई बार मरम्मत और फ्यूल टैंक की सफाई के बावजूद वाहन की समस्या दूर नहीं हुई। निर्माता और डीलर ने निर्माण संबंधी किसी भी दोष को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद वाहन मालिक ने स्वतंत्र लैब से ईंधन की जांच कराई।
लैब रिपोर्ट के बाद आयोग ने क्या माना?
एसजीएस लैब की रिपोर्ट में सामने आया कि पेट्रोल की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं थी। समस्या इंजन और E-20 ईंधन की अनुकूलता से जुड़ी थी। पेट्रोल पंप पर अन्य ग्राहकों ने ऐसी शिकायत भी दर्ज नहीं कराई थी।
आयोग ने कहा कि उपभोक्ता को उचित सेवा नहीं मिली। वाहन बदलने से इनकार करना और समस्या का समाधान नहीं करना सेवा में कमी माना गया।
E-20 इंजन विवाद पर आयोग का फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
आयोग ने निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता को उसी मॉडल की नई E-20 कम्पैटिबल कार उपलब्ध कराई जाए। यदि 45 दिनों में वाहन नहीं बदला जाता है, तो वाहन की खरीद, रजिस्ट्रेशन और बीमा पर खर्च हुई लगभग ₹20.50 लाख की राशि लौटानी होगी।
इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए ₹1 लाख और कानूनी खर्च के लिए ₹10 हजार देने का आदेश भी दिया गया। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।
E-20 ईंधन को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
देश में पेट्रोलियम आयात कम करने और प्रदूषण घटाने के उद्देश्य से E-20 ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है।
हालांकि कुछ वाहन मालिकों ने इंजन की कार्यक्षमता, माइलेज और तकनीकी अनुकूलता को लेकर चिंताएं जताई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन खरीदते समय निर्माता द्वारा निर्धारित ईंधन मानकों की जानकारी लेना आवश्यक है।
एक नजर में
- शिकायतकर्ता: डॉ. प्रेमराज डेब्टा
- स्थान: रायपुर, छत्तीसगढ़
- वाहन: ग्रैंड विटारा
- विवाद: E-20 ईंधन से इंजन की समस्या
- राहत: नई कार या ₹21.60 लाख का भुगतान
- समय सीमा: 45 दिन
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