छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन 25 अक्टूबर को बड़ा प्रदर्शऩ करने जा रही है। जिसमे पूरे प्रदेश के करीब 7 हजार प्राइवेट स्कूल के कर्मचारी प्रदर्शन करेंगे। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि प्राइवेट स्कूल के शिक्षक और कर्मचारी सड़क पर आकर आंदोलन करने लगे। इसके पीछे एक बड़ा कारण है। कारण है राइट टू एजुकेशन यानी कि आरटीई के तहत पढ़ने वाले बच्चों का सरकारी पैसा अभी तक स्कूलों को नहीं दिया गया है। जबकि सेंट्रल गवर्मेंट ने राज्य के हिस्से का फंड जारी कर दिया है। इस फंड के जिलाशिक्षाधिकारी अपने-अपने जिलों में रिलीज करेंगे। लेकिन बात यहीं अटकी है। बात है कमीशन की क्योंकि करीब 130 करोड़ रुपए की राशि में जमकर कमीशनखोरी हो रही है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पूरे छत्तीसगढ़ के जिलाशिक्षाधिकारियों ने इस पैसों को रिलीज करने के लिए 10 फीसदी कमीशन की मांग की है। यानी की यदि प्राइवेट स्कूलों को पैसा चाहिए तो वो 10 से 13 करोड़ रुपए की राशि चुपचाप जिलाशिक्षाधिकारियों को वापस कर दें।बस बात यहीं बिगड़ गई।
जिला शिक्षाधिकारी बिना पैसे लिए नहीं खसकाते हैं फाइल !
प्राइवेट स्कूलों का आरोप है कि आरटीई का पैसा जो सरकार के द्वारा प्राइवेट स्कूलों को दिया जाता है उस में बड़े पैमाने पर कमीशन मांगा जा रहा है जिला शिक्षा अधिकारियों को कमीशन नहीं देने के कारण 3 महीनों से फंड को रोका गया है। दीपावली जैसा बड़ा त्यौहार सिर पर है। लिहाजा प्राइवेट स्कूल अब इस फंड को लेकर आऱ-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। एसोसिएशन के मुताबिक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने द्वारा पिछली बार डायरेक्ट चीजों को संज्ञान में लेकर राशि का भुगतान स्कूलों के खातों में करवा दिया था। लेकिन इस बार राशि पर जिलाशिक्षाधिकारी नजरें गड़ाए बैठे हैं।
आपको बता दें कि प्रदेश भर में 7000 स्कूल हैं जिसमें गरीब तबके से कुछ बच्चों को पढ़ाई करवाने के लिए दाखिला दिलवाया जाता है । उन्हीं बच्चों के एडमिशन की फीस के साथ ही पूरा खर्च तकरीबन 106 करोड़ केंद्र सरकार से मिलता है और बाकी के 25 करोड़ से ज्यादा की राशि राज्य सरकार देती है।
लेकिन 130 करोड़ की राशि जो प्राइवेट स्कूलों को मिलती है उसका 10% मतलब 13 करोड़ से ज्यादा का कमीशन जिला शिक्षा अधिकारियों पर मांगने का आरोप लग रहा है।
प्रदेश भर में अभी वर्तमान में 28 जिले हैं और 28 जिलों में 28 जिला शिक्षा अधिकारी हैं और यह 10 करोड़ की राशि सभी 28 जिला शिक्षा अधिकारियों में बंटना है।इसके अलावा प्राइवेट स्कूलों की मान्यता को लेकर के भी भ्रष्टाचार करने का आरोप प्राइवेट एसोसिएशन ने जिला शिक्षा अधिकारियों पर लगाए हैं उनका सीधा आरोप है कि मान्यता देने के लिए 50-50 हजार कैश की डिमांड की जा रही है। ऐसा नहीं करने पर मान्यताएं नहीं मिल रही है । जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। अब ऐसे में शिक्षा की रक्षा करने वाले अधिकारी ही भक्षक का रुप धारण कर लें तो प्रदेश में योजनाओं का क्या होगा आप समझ सकते हैं।
jai sir is a dedicated news blogger at The Hind Press, known for his sharp insights and fact-based reporting. With a passion for current affairs and investigative journalism, he covers national, international, sports, science, headlines, political developments, environment, and social issues with clarity and integrity.
