दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर किसानों की आवाज़ से गूंज उठा। हजारों किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी अधिकार बनाने और कर्ज माफी की मांग को लेकर एकजुट हुए। किसानों ने कहा कि जब तक MSP को कानून का रूप नहीं दिया जाता, तब तक खेती को लाभकारी व्यवसाय नहीं बनाया जा सकता।
प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना था कि उन्हें बार-बार अपनी फसलों का उचित मूल्य पाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है। यही कारण है कि वे MSP को किसानों का मूल अधिकार मानते हैं।
पंजाब से आए किसान नेता सुखविंदर सिंह ने कहा कि बीते वर्षों में सरकार ने बड़े उद्योगपतियों के लाखों करोड़ के कर्ज माफ किए हैं, लेकिन देश के किसानों का कुल कर्ज 15 लाख करोड़ से अधिक नहीं है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि किसानों को एकमुश्त राहत देकर उन्हें आर्थिक संकट से बाहर निकाले।
हरियाणा के किसान और संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनीतिक) के सदस्य किशन पाल चौधरी ने किसान सम्मान निधि की राशि को बेहद कम बताया। उनका कहना है कि सरकार को हर किसान परिवार को सालाना कम से कम ₹12,000 सहायता देनी चाहिए।
वहीं, किसानों ने अमेरिका से संभावित व्यापार समझौतों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि यदि कृषि और डेयरी उत्पाद समझौतों में शामिल हुए, तो भारतीय किसानों पर भारी असर पड़ेगा। किसान नेता मंजीत सिंह ने साफ कहा कि अमेरिका का किसान बिज़नेस मॉडल पर काम करता है, जबकि भारत का अधिकांश किसान सिर्फ अपने परिवार के लिए खेती करता है। इसलिए सरकार को कृषि क्षेत्र को किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से बाहर रखना चाहिए।
यह महापंचायत संकेत देती है कि MSP पर आंदोलन की आग फिर भड़क सकती है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले समय में और बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।
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