फर्जी जाति प्रमाण

मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के मामलों पर गंभीर चर्चा हुई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी ने गलत प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी सेवा या पदोन्नति प्राप्त की है तो उसके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

विभागों के बीच बढ़ेगा समन्वय

बैठक में कहा गया कि फर्जी जाति प्रमाण मामलों के निराकरण के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को साझा रूप से कार्य करने और समयबद्ध जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए। सरकार का उद्देश्य वास्तविक पात्रों के अधिकारों की रक्षा करना है।

आदिवासी समाज की मांगों पर हुई चर्चा

फर्जी जाति प्रमाण मामलों के अलावा बैठक में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज द्वारा प्रस्तुत विभिन्न मांगों और सुझावों पर भी विचार किया गया। पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, अधिकारियों के प्रशिक्षण और जनजातीय हितों से जुड़े अन्य विषयों पर भी विस्तृत समीक्षा की गई।

छात्रवृत्ति योजना में संशोधन की तैयारी

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि फर्जी जाति प्रमाण मामलों के साथ-साथ आदिवासी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति योजना को भी वर्तमान जरूरतों के अनुसार संशोधित किया जाए। इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश संबंधित विभाग को दिए गए।

सरकार ने दिखाई सख्त मंशा

बैठक के अंत में स्पष्ट किया गया कि फर्जी जाति प्रमाण मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार सभी मामलों की नियमित समीक्षा करेगी और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

यह भी पढ़ें:
महापौर निधि के 104.54 करोड़ जारी, विकास कार्य होंगे तेज
भगवान श्री राम के आदर्शों पर चलने का मुख्यमंत्री साय का आह्वान
VB G-RAM-G कानून लागू, जानिए नए ग्रामीण रोजगार नियम पूरी जानकारी