फेमा केस ललित मोदी

पूर्व आईपीएल चेयरमैन ललित मोदी को 15 साल पुराने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े मामले में बड़ी राहत मिली है। फेमा केस ललित मोदी में SAFEMA अपीलीय ट्रिब्यूनल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा लगाया गया जुर्माना रद्द कर दिया।

यह मामला वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान आईपीएल के दूसरे सीजन को दक्षिण अफ्रीका में आयोजित कराने के लिए भेजी गई राशि से जुड़ा था। ट्रिब्यूनल ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ललित मोदी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी साबित नहीं होती।

फेमा केस ललित मोदी में ट्रिब्यूनल ने क्या कहा?

105 पन्नों के फैसले में ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि ललित मोदी के खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए। आदेश में कहा गया कि वह बीसीसीआई के वित्तीय लेनदेन के प्रत्यक्ष प्रभारी नहीं थे।

न्यायाधिकरण ने माना कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति पर जुर्माना नहीं लगाया जा सकता। इसी कारण ईडी का आदेश निरस्त कर दिया गया।

ED ने क्या लगाए थे आरोप?

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप था कि आईपीएल 2009 के आयोजन के लिए लगभग 4.98 करोड़ अमेरिकी डॉलर भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्व अनुमति के बिना विदेश भेजे गए थे।

ईडी ने वर्ष 2011 में कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद 2018 में ललित मोदी, बीसीसीआई के कुछ पूर्व अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों पर आर्थिक दंड लगाया गया था।

इस आदेश को सभी पक्षों ने SAFEMA अपीलीय ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी।

फेमा केस ललित मोदी पर पूर्व IPL चेयरमैन की प्रतिक्रिया

फैसले के बाद ललित मोदी ने कहा कि उन्होंने हमेशा भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के विकास के लिए काम किया। उन्होंने किसी भी व्यक्तिगत अनियमितता से इनकार किया।

उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल उनकी व्यक्तिगत राहत नहीं है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कानूनी कार्रवाई हमेशा तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए।

IPL 2009 दक्षिण अफ्रीका में क्यों खेला गया था?

वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बड़ी चुनौती थी। इसी वजह से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आईपीएल का दूसरा सीजन दक्षिण अफ्रीका में आयोजित करने का फैसला लिया था।

यह निर्णय उस समय भारतीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा प्रशासनिक कदम माना गया था। बाद में इसी आयोजन से जुड़े विदेशी भुगतान की जांच शुरू हुई।

आगे की प्रक्रिया पर रहेगी नजर

फेमा केस ललित मोदी में आए इस फैसले के बाद कानूनी विशेषज्ञ इसे महत्वपूर्ण निर्णय मान रहे हैं। हालांकि, यदि प्रवर्तन निदेशालय चाहे तो उपलब्ध कानूनी विकल्पों के तहत आगे की अपील कर सकता है।

फिलहाल ट्रिब्यूनल के आदेश से ललित मोदी को बड़ी राहत मिली है और वर्षों से लंबित यह मामला एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है।

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