2019 के आम चुनाव में कांग्रेस ने राफेल का मुद्दा जोरशोर से उठाया था। राहुल गांधी अपने हर चुनावी दौरे में राफेल और मोदी सरकार को घेरते नजर आते थे। लेकिन चुनाव के बाद राफेल जैसे कहीं खो गया था। राफेल का मुद्दा ही हवा हो गया। लेकिन अब 2 साल बाद राफेल को लेकर एक नया दावा किया जा रहा है। दावा किसी इंडियन राजनेता या मीडिया हाउस ने नहीं बल्कि फ्रांस की एक पोर्टल मीडियापार्ट ने किया है।

फ्रांसीसी पोर्टल मीडियापार्ट ने दावा किया है कि इस डील को पूरा करने के लिए बिचौलिए सुशेन गुप्ता को 7.5 मिलियन यूरो यानी करीब 65 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई थी। ये रिश्वत फ्रांसीसी विमान निर्माता डसॉल्ट एविएशन की ओर से दी गई थी। जिसके सबूत भी उनके पास हैं। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के बाद अब कांग्रेस एक बार फिर राफेल को लेकर मुखर हो गई है। एक बार फिर कांग्रेस के चिराग से राफेल का जिन्न बाहर आ गया है।

ईडी ने नहीं लिया एक्शन

भारत को राफेल जेट की बिक्री को सुरक्षित करने के लिए डसॉल्ट ने 2007 से 2012 के बीच एक शेल कंपनी के साथ ‘ओवरबिल’ आईटी अनुबंधों के जरिए बिचौलिए सुशेन गुप्ता को कम से कम 7.5 मिलियन यूरो का भुगतान किया था। अक्टूबर 2018 से संबंधित कागजात मौजूद होने के बावजूद सीबीआई और ईडी ने कोई एक्शन नहीं लिया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दस्तावेजों के होने के बावजूद भारतीय एजेंसियों ने मामले को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।

दस्तावेजों पर टिप्पणी से इनकार

रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित झूठे चालानों की एक प्रणाली का उपयोग करते हुए ज्यादातर पैसा सावधानी से मॉरीशस भेजा गया था। इनमें से कुछ चालानों में फ्रांसीसी कंपनी का नाम भी गलत था। वहीं इस दावे के बाद सुशेन गुप्ता ने कोई जवाब नहीं दिया है। दूसरी तरफ डसॉल्ट ने इन दस्तावेजों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।