भारत और ब्रिटेन के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। दोनों पक्षों ने मुख्य शर्तों पर सहमति बना ली है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लंदन दौरे से पहले यह बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। इस समझौते पर दस्तखत अब सिर्फ औपचारिकता है।
भारत ब्रिटेन एफटीए समझौता न केवल व्यापार बढ़ाएगा बल्कि निवेश, सेवाएं और तकनीकी सहयोग को भी मजबूती देगा।
दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात पर लगने वाला शुल्क अब बहुत हद तक समाप्त हो जाएगा, जिससे व्यापार को नई गति मिलेगी।
इस समझौते के जरिए भारत को ब्रिटेन में बना-बनाया बाजार मिलेगा, जिससे देश के MSME सेक्टर को फायदा होगा।
वहीं ब्रिटेन भारत में शिक्षा, रक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
भारत ब्रिटेन एफटीए समझौता से खाद्य, टेक्सटाइल, ऑटो और रसायन उद्योगों को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है।
पश्चिमी प्रतिबंधों को लेकर भारत ने साफ किया कि वह राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा, खासकर ऊर्जा सुरक्षा के मामले में।
यह समझौता वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक स्थिति का प्रमाण है और ब्रिटेन के साथ उसके संबंधों को नई दिशा देगा।
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