गरियाबंद शिक्षा विभाग विवाद को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। 2024 में शिक्षा विभाग द्वारा की गई 22 अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।

जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने इन नियुक्तियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नियुक्ति की प्रक्रिया में तय मानकों की अनदेखी की गई है।

उनका दावा है कि शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, पहले एक जांच समिति का गठन होना चाहिए था जिसकी अध्यक्षता अपर कलेक्टर करते।

इसके बाद ही कलेक्टर की स्वीकृति प्राप्त कर नियुक्ति आदेश जारी किए जाते। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को दरकिनार कर त्वरित रूप से नियुक्तियां कर दी गईं।

संजय नेताम ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लाभार्थियों से नियुक्तियों के बदले अवैध वसूली की गई, जो भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

उनका सवाल है – यदि सब कुछ नियम के अनुसार था, तो कलेक्टर की मंजूरी क्यों नहीं ली गई? क्या प्रक्रिया को जानबूझकर छुपाया गया?

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी आनंद कुमार सारस्वत ने कहा कि नियुक्ति से पहले समिति बनाई गई थी और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई।

वहीं, अपर कलेक्टर अरविंद पांडेय ने स्वीकार किया कि इन नियुक्तियों के लिए कलेक्टर की मंजूरी नहीं ली गई थी, लेकिन शिकायत की स्थिति में जांच कराई जाएगी।

गरियाबंद शिक्षा विभाग विवाद ने अब पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मूल प्रशासनिक सिद्धांतों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि कोई लापरवाही हुई है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।