रायपुर। गुरुवार को राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस दौरान राज्यपाल अनुसुईया उइके बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश-दुनिया में आदिवासियों की संस्कृति बहुत समृद्ध है। आदिवासी, समृद्ध संस्कृति के वाहक होने के साथ ही प्रकृति के पूजारी भी हैं। उनकी जीवनशैली और प्रकृति के बीच एक गहरा सामंजस्य है।

आदिवासी न्यूनतम आवश्यकताओं पर जीने वाले होते हैं। यह वास्तव में उनकी जीवनशैली का मूलमंत्र है। वे प्रकृति से उतना ही लेते हैं, जितनी उन्हें आवश्यकता होती है। क्योंकि वे धरती को अपनी माता मानते हैं। आधुनिक समाज को कई मायनों में उनसे बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। आज विश्व, जलवायु परिवर्तन के कारण अनेकों समस्याओं का सामना कर रहा है, इसे हल करने का उपाय प्रकृति से प्रेम करने में और उसका आदर करने में छिपा हुआ है।

कलाकारों का किया स्वागत

राज्यपाल ने इस समारोह में देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से आए लोक कलाकारों का छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्वागत करते हुए कहा कि हमारे देश में अतिथि देवो भवः की परंपरा रही है। मुझे विश्वास है कि यहां पधारे अतिथि, छत्तीसगढ़ में अपने प्रवास का आनंद लेंगे और सुखद यादें लेकर जाएंगे। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की अग्रिम बधाई भी दी।

अनेकता में एकता की अनोखी छटा दिखाई दे रही है’

राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के दौरान अनेकता में एकता की अनोखी छटा दिखाई दे रही है। ऐसा लग रहा है, मानो यहां लघु भारत आ गया है। यह महोत्सव, विभिन्न परंपराओं और संस्कृतियों का संगम है। इस सुंदर और भव्य राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के आयोजन के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि केन्द्र और राज्य शासन मिलकर आदिवासी हितों की रक्षा के साथ शिक्षा, आर्थिक कल्याण और सामुदायिक उत्थान को बढ़ावा देने के लिए अनेक कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।

लोक कलाओं का देखने का मिलेगा मौका- राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि आदिवासियों के सशक्तिकरण के लिए उन्हें जागरूक करना और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाना जरूरी है। इस दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कई अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में विदेशी कलाकारों के नृत्य के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के करमा, सुआ, शैला आदि की प्रस्तुति भी देखने को मिलेगी। वहीं विभिन्न प्रदेशों के मनमोहक लोक नृत्य भी देखने को मिलेंगे।