राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को नई जिम्मेदारी दी गई है क्योंकि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपना पद छोड़ा।
धनखड़ ने संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले इस्तीफा देकर देश की राजनीति को चौंका दिया और चर्चा का विषय बन गए।
इसके बाद हरिवंश नारायण सिंह को कार्यकारी सभापति के रूप में नियुक्त किया गया और उन्होंने अपने कर्तव्यों का पालन शुरू किया।
उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अनुमोदित की गई और संसद सचिवालय द्वारा इसकी जानकारी दी गई।
हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति रहे हैं और उन्होंने उच्च सदन की कार्यवाही में अनुभव अर्जित किया है।
अब वह संसद सत्र को सुचारु रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी निभाएंगे, जब तक नया उपराष्ट्रपति नहीं चुना जाता।
उनकी जिम्मेदारी में सदन की मर्यादा बनाए रखना, पक्ष-विपक्ष को समान अवसर देना और विधायी कार्यों का संचालन करना शामिल है।
हरिवंश नारायण सिंह कार्यकारी सभापति बनने के बाद उन्होंने कहा कि वे निष्पक्षता और संवैधानिक दायित्वों के साथ काम करेंगे।
इस बदलाव से संसद में संचालन को लेकर स्थिरता बनी रहेगी और सत्र का कामकाज भी सुचारु रूप से आगे बढ़ेगा।
अब देश को नए उपराष्ट्रपति की घोषणा का इंतजार है, लेकिन तब तक हरिवंश नारायण सिंह का अनुभव सदन के लिए उपयोगी रहेगा।
