इकरा हसन जांच रिपोर्ट में सच्चाई सामने आ गई है। 1 जुलाई को एडीएम संतोष बहादुर सिंह पर अभद्रता का आरोप लगाने वाली सांसद इकरा हसन के दावे झूठे और निराधार साबित हुए हैं।

मंडलायुक्त द्वारा आदेशित जांच में यह स्पष्ट हुआ कि एडीएम का व्यवहार मर्यादित और नियमबद्ध था। रिपोर्ट के अनुसार, उनके विरुद्ध कोई भी अमर्यादित आचरण प्रमाणित नहीं हो पाया।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

सांसद इकरा हसन का कहना था कि वे छुटमलपुर की समस्याओं को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष शमा परवीन के साथ एडीएम से मिलने गई थीं।
उनका आरोप था कि एडीएम ने अभद्रता करते हुए कार्यालय से बाहर निकलने को कहा और यह भी कहा कि “यह कार्यालय मेरा है, जो चाहे कर सकता हूं।”

इसके बाद उन्होंने शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की थी।

एडीएम का पक्ष और जांच के निष्कर्ष

एडीएम संतोष बहादुर सिंह ने बताया कि वे उस समय मीटिंग में थे, लेकिन सांसद को सम्मानपूर्वक स्थान दिया गया, और किसी भी प्रकार का अपमानजनक व्यवहार नहीं किया गया।

जांच रिपोर्ट ने एडीएम की बात को ही सत्य माना और सांसद द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को असत्य बताया।

अब क्या आगे?

जांच रिपोर्ट के बाद मंडलायुक्त ने सभी प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जनप्रतिनिधियों से विनम्रता और शिष्टाचार के साथ व्यवहार करें। यह मामला अब पूर्ण विराम की ओर बढ़ चुका है।