छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में 17वां दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उपाधियाँ एवं पदक प्रदान किए।

305 विद्यार्थियों को मिली शैक्षणिक उपलब्धि की मान्यता

दीक्षांत समारोह के दौरान—

5 शोधार्थियों को डी.लिट् (डॉक्टर ऑफ लिटरेचर)

64 शोधार्थियों को शोध उपाधि (पीएचडी)

236 विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए गए

232 स्वर्ण पदक

4 रजत पदक

राज्यपाल ने सभी उपाधि और पदक प्राप्तकर्ताओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कला, संगीत और संस्कृति समाज को दिशा देते हैं: राज्यपाल

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि कला, संगीत और संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होते हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी कला और ज्ञान का उपयोग राष्ट्र निर्माण और समाज के कल्याण के लिए करें।

विश्वविद्यालय के नामकरण को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा

राज्यपाल ने कहा कि खैरागढ़ का यह संगीत विश्वविद्यालय भविष्य में राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाएगा और इसके लिए आवश्यक औपचारिक प्रक्रियाएं पूर्ण करने के निर्देश विश्वविद्यालय प्रशासन को दिए गए।

उन्होंने दानवीर राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती देवी के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

विशिष्ट अतिथियों ने भी किया मार्गदर्शन

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा एवं डॉ. अनुज शर्मा उपस्थित रहे।
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि शिक्षा ही किसी भी समाज को सभ्य और सुसंस्कृत बनाने की आधारशिला है।

दीक्षांत भविष्य के संकल्प का दिन: कुलपति

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल प्रमाण-पत्र वितरण का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममूल्यांकन और भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने विद्यार्थियों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया।

ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर स्थित राजकुमारी शारदा देवी सिंह बावली की नामपट्टिका का अनावरण किया। यह बावली एक प्राचीन धरोहर है, जिसके संरक्षण का कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन डॉ. सौमित्र तिवारी द्वारा किया गया।