भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने के लिए 858 करोड़ रुपये के दो अहम सौदों को मंजूरी दी है, जिससे देश की हवाई सुरक्षा और समुद्री निगरानी क्षमताओं में बड़ा इजाफा होगा। ये समझौते भारतीय सेना और नौसेना दोनों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

रक्षा मंत्रालय द्वारा किए गए पहले समझौते के तहत रूस की सरकारी एजेंसी Rosoboronexport से तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदा जाएगा। करीब 445 करोड़ रुपये के इस करार के जरिए भारतीय सेना को एक ऐसा आधुनिक सिस्टम मिलेगा, जो दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखता है। इससे भारत-रूस रक्षा संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

वहीं दूसरा समझौता Boeing India Defense Private Limited के साथ 413 करोड़ रुपये में हुआ है। इस डील का उद्देश्य भारतीय नौसेना के P-8I लंबी दूरी के समुद्री निगरानी विमानों का मेंटेनेंस और तकनीकी सपोर्ट सुनिश्चित करना है। खास बात यह है कि यह कार्य भारत में ही स्वदेशी संसाधनों के जरिए किया जाएगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को भी बढ़ावा मिलेगा।

P-8I विमान भारतीय नौसेना की ताकत का अहम हिस्सा हैं। ये विमान पनडुब्बी रोधी अभियानों और समुद्री निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के लिए इन विमानों का उपयोग किया जाता है। वर्तमान में नौसेना के पास ऐसे 12 विमान हैं, जिनकी क्षमता अब इस नए समझौते के बाद और बेहतर हो जाएगी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन सौदों के जरिए भारत न केवल अपनी सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से अपनी सैन्य रणनीति को भी और सशक्त बनाएगा।