देश में एक बड़े फर्जी चंदा नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें जालसाज ईरान युद्ध के नाम पर लोगों से अवैध रूप से पैसा और कीमती सामान जुटा रहे हैं। इस पूरे मामले पर Intelligence Bureau (आईबी) ने गंभीर चेतावनी जारी की है।
युद्ध की तस्वीरों से भावनाओं का शोषण
जांच एजेंसियों के मुताबिक, ठग युद्ध प्रभावित लोगों की मदद के नाम पर आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।
वे भावनात्मक और डरावनी तस्वीरों का इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करते हैं, जिनमें से कई तस्वीरें डिजिटल रूप से एडिट की गई होती हैं।
इन तस्वीरों को देखकर लोग भावुक हो जाते हैं और बिना सत्यापन किए नकद राशि, सोना और अन्य कीमती वस्तुएं दान कर देते हैं।
जम्मू-कश्मीर बना सबसे बड़ा केंद्र
एजेंसियों ने पाया है कि Jammu and Kashmir इस घोटाले से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है।
यहां ठग घर-घर जाकर चंदा मांग रहे हैं और झूठी कहानियों के जरिए लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क पहले भी अलगाववादी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने में सक्रिय रहा है।
करोड़ों रुपये और गहनों की ठगी
रिपोर्ट के अनुसार, इस फर्जी अभियान के जरिए अब तक करोड़ों रुपये की वसूली की जा चुकी है, जिसमें केवल जम्मू-कश्मीर में करीब 16 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है।
कुछ मामलों में लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत, सोने के गहने और घरेलू धातु तक दान कर दिए।
ऑफलाइन नेटवर्क से बच रहे ट्रैकिंग से
जांच में सामने आया है कि ठग जानबूझकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दूर रह रहे हैं।
वे ऑफलाइन तरीके से चंदा इकट्ठा कर फर्जी रसीदें जारी करते हैं, जिससे उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना कठिन हो जाता है।
देश विरोधी गतिविधियों से जुड़ी आशंका
सुरक्षा एजेंसियों को सबसे बड़ी चिंता इस फंड के इस्तेमाल को लेकर है।
अधिकारियों का कहना है कि इस पैसे का एक हिस्सा देश विरोधी गतिविधियों और अलगाववादी नेटवर्क को मजबूत करने में इस्तेमाल हो सकता है।
एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए सक्रिय जांच में जुटी हैं और नागरिकों से अपील कर रही हैं कि किसी भी अज्ञात संस्था को दान देने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें।
