देश में थोक स्तर पर महंगाई का दबाव लगातार बना हुआ है। जनवरी 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 1.81% पर पहुंच गई, जबकि दिसंबर 2025 में यह 0.83% थी। यह लगातार तीसरा महीना है जब थोक महंगाई दर में इजाफा दर्ज किया गया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस वृद्धि के पीछे खाद्य वस्तुओं, गैर-खाद्य उत्पादों और विनिर्मित सामानों की कीमतों में महीने-दर-महीने हुई बढ़ोतरी प्रमुख कारण रही। विशेष रूप से बेसिक मेटल, वस्त्र (टेक्सटाइल) और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में कीमतों की तेजी ने महंगाई को ऊपर की ओर धकेला।

यदि पिछले वर्ष जनवरी की तुलना करें, तो उस समय WPI महंगाई 2.51% थी। हालांकि मौजूदा दर उससे कम है, लेकिन हाल के महीनों में लगातार बढ़ती प्रवृत्ति बाजार के लिए संकेतक मानी जा रही है।

उद्योग मंत्रालय के अनुसार उत्पादन लागत में बढ़ोतरी का असर थोक कीमतों पर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल और औद्योगिक वस्तुओं की कीमतों में यही रुख बना रहता है, तो आने वाले समय में खुदरा महंगाई पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

आर्थिक विश्लेषकों की नजर अब आगामी महीनों के आंकड़ों पर है, जो देश की औद्योगिक और उपभोक्ता मांग की दिशा तय करेंगे।