जितिया पारण थाली में मड़ुआ रोटी, नोनी साग और सतपुतिया की सब्जी, मूल फोटो

जीवित्पुत्रिका यानी जितिया का निर्जला व्रत इस बार शनिवार, 3 अक्टूबर को है. अगले दिन रविवार सुबह व्रती माताएं पारण करेंगी. ऐसे में जितिया पारण थाली की तैयारी अभी से शुरू हो जाती है. यहां जानिए थाली में क्या रखा जाता है और तीन खास चीजें घर पर कैसे बनाएं.

जितिया पारण थाली में क्या-क्या बनता है

बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में जितिया पारण थाली में आमतौर पर नोनी साग, मड़ुआ यानी रागी की रोटी और सतपुतिया की सब्जी रखी जाती है. कई घरों में अरवा चावल, दाल, कद्दू और कंदा की सब्जी भी बनती है. हालांकि थाली हर परिवार की परंपरा के हिसाब से थोड़ी बदल जाती है.

2 से 4 अक्टूबर तक का पूरा क्रम

  • नहाय-खाय: शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026.
  • निर्जला व्रत: शनिवार, 3 अक्टूबर 2026.
  • पारण: रविवार, 4 अक्टूबर की सुबह.
  • अष्टमी तिथि: द्रिक पंचांग के मुताबिक 2 अक्टूबर रात 9:29 से 3 अक्टूबर शाम 7:21 तक.
  • पारण का सटीक समय: अपने शहर के पंचांग या पुरोहित से मिलाएं.

नोनी, मड़ुआ और सतपुतिया ही क्यों

दरअसल इन चीजों के पीछे मान्यता और खेती, दोनों की कहानी है. नवभारत लाइव की एक रिपोर्ट के मुताबिक पुराने समय में इन इलाकों में मड़ुआ की खेती बड़े पैमाने पर होती थी. इसलिए यह रोटी त्योहार की थाली का हिस्सा बन गई.

वहीं नोनी साग को लेकर मान्यता है कि इसके बिना जितिया अधूरा रहता है. कई जगह इसे नहाय-खाय के दिन खाया जाता है. साथ ही कई परिवार पारण की थाली में भी इसे रखते हैं. सतपुतिया को कुछ इलाकों में झिंगनी भी कहा जाता है.

नोनी साग बनाने का आसान तरीका

नोनी एक देसी पत्तेदार साग है. इसे बनाने में 15 मिनट से ज्यादा नहीं लगते.

सामग्री: एक गड्डी नोनी साग, 2 हरी मिर्च, एक सूखी लाल मिर्च, आधा चम्मच जीरा, चुटकी भर मेथी दाना, चुटकी भर हल्दी, नमक और सरसों का तेल.

सबसे पहले साग को दो-तीन पानी में अच्छी तरह धो लें. दरअसल इसकी जड़ों में मिट्टी फंसी रहती है. इसके बाद मोटे डंठल हटाकर पत्तों को बारीक काट लें.

अब कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें. फिर जीरा, मेथी दाना और सूखी लाल मिर्च डालें. इसके बाद कटी हरी मिर्च और साग डाल दें. साथ ही हल्दी और नमक मिलाएं.

ध्यान रहे कि साग में ऊपर से पानी न डालें. दरअसल यह अपने ही पानी में पक जाता है. ढककर धीमी आंच पर 8 से 10 मिनट पकाएं. बीच में एक-दो बार चलाते रहें.

मड़ुआ रोटी कैसे बनाएं

मड़ुआ का आटा गेहूं जैसा लचीला नहीं होता. इसलिए इसकी रोटी बेलने के बजाय हाथ से थपथपाकर बनाई जाती है.

सामग्री: 2 कप मड़ुआ आटा, चुटकी भर नमक, गुनगुना या हल्का गर्म पानी और परोसने के लिए घी.

सबसे पहले आटे में नमक मिलाएं. इसके बाद थोड़ा-थोड़ा गर्म पानी डालकर नरम आटा गूंथें. दरअसल गर्म पानी से आटा बेहतर जुड़ता है और रोटी कम टूटती है.

अब एक लोई लेकर गीले हाथों से हथेली पर चपटा करें. चाहें तो गीले सूती कपड़े या बटर पेपर पर थपथपाएं. फिर गर्म तवे पर डालें और दोनों तरफ सेंक लें. आखिर में सीधी आंच पर हल्का फुलाएं और ऊपर से घी लगा दें.

सतपुतिया की सब्जी की विधि

सतपुतिया की सब्जी हल्के मसाले में बनती है. इसी वजह से कई घरों में इसे पारण के दिन पसंद किया जाता है.

सामग्री: 250 ग्राम सतपुतिया, एक हरी मिर्च, आधा चम्मच जीरा, हल्दी, नमक और एक चम्मच सरसों का तेल.

सबसे पहले सतपुतिया धोकर हल्का छील लें. फिर छोटे टुकड़ों में काटें. इसके बाद तेल में जीरा और हरी मिर्च का तड़का लगाएं. अब सब्जी, हल्दी और नमक डालकर ढक दें. आमतौर पर यह 10 से 12 मिनट में गल जाती है. ऐसे में अलग से पानी डालने की जरूरत कम पड़ती है.

जितिया पारण थाली सजाने का तरीका

पारण वाली सुबह सब कुछ एक साथ बनाना मुश्किल लगता है. इसलिए काम बांट लें. उदाहरण के लिए साग और सतपुतिया शनिवार शाम धोकर और काटकर फ्रिज में रख लें. वहीं मड़ुआ आटा सुबह ताजा गूंथें.

इसके बाद जितिया पारण थाली में बीच में मड़ुआ रोटी रखें. साथ में नोनी साग और सतपुतिया की सब्जी परोसें. अगर परिवार में चावल-दाल की परंपरा है, तो वह भी जोड़ लें.

खासकर लंबे निर्जला व्रत के बाद कई परिवार पहले पानी या हल्का पेय लेते हैं. फिर धीरे-धीरे भोजन करते हैं. हालांकि हर घर का तरीका अलग होता है.

जितिया पारण थाली से जुड़े आम सवाल

नोनी साग न मिले तो क्या करें?

नवभारत लाइव की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नोनी साग अब कम दिखता है. ऐसे में पास की सब्जी मंडी में एक दिन पहले पूछ लें. अगर फिर भी न मिले, तो घर की परंपरा के हिसाब से बड़ों से विकल्प पूछें.

क्या मड़ुआ रोटी पहले से बनाकर रख सकते हैं?

बेहतर है कि रोटी ताजा बनाएं. दरअसल ठंडी होने पर यह सख्त हो जाती है. हालांकि आटा और सब्जियां पहले से तैयार रखी जा सकती हैं.

नोट: व्रत और पारण से जुड़ी बातें पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं. तिथि और पारण का समय शहर के हिसाब से बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग जरूर देखें. खानपान से जुड़ी किसी खास सेहत संबंधी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें.

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