पिता वह चांद जो बच्चे के बचपने में रहता है पूनम का, तो धीरे-धीरे घटता हुआ क्रमशः हो जाता है अमावस का।
समंदर के जैसा भी है पिता, जिसकी सतह पर खेलती हैं असंख्य लहरें, तो जिसकी गहराई में है खामोशी ही खामोशी। वह चखने में भले खारा लगे, लेकिन जब बारिश बन खेतों में आता है तो हो जाता है मीठे से मीठा। परन्तु एक पिता ने इन बातों को झुठला दिया वो उत्तर प्रदेश के ललितपुर से हैं।

आपको बता दें कि एक विशेष अदालत ने तीन बेटियों की हत्या के जुर्म में उनके पिता को मौत की सजा सुनाई है। ललितपुर जिले के सहायक शासकीय अधिवक्ता राकेश तिवारी ने शनिवार को बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के विशेष न्यायाधीश निर्भय प्रकाश ने अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद 13 नवंबर 2018 की रात घर में सो रही अपनी तीन नाबालिग बेटियों को हथौड़े मारकर घायल करने और उन्हें जिंदा जला देने के मामले में दोषी पाए गए छिदामी उर्फ छिद्दू (35) को शुक्रवार को मौत की सजा सुनाई और उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

उन्होंने घटना की पृष्ठभूमि के बारे में बताया कि बानपुर थाना क्षेत्र के वीर गांव के रहने वाले छिदामी उर्फ छिद्दू (35) ने शराब के नशे में 13 नवंबर 2018 की रात घर में सो रही अपनी तीनों पुत्रियों के सिर पर हथौड़े से वार किए थे, इसके बाद रसोई गैस से घर में आग भी लगा दी थी,जिसमें तीनों बेटियां बुरी तरह झुलस गईं थीं। तिवारी ने बताया कि घटना की जानकारी होने पर गांव के लोग तीनों बच्चियों को इलाज के लिए अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। इस मामले में ग्रामीण पूरन सिंह ने छिदामी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। इस पूरी घटना के समय छिदामी की पत्नी अपने मायके में थी। अपने ही हांथो से पिता ने किया अपने परिवार का सर्वनाश !