Asian Games 2026, Shooting Gold, 10m Air Pistol

हरियाणा के रेवाड़ी से निकले कमलजीत सिंह ने एशियाई खेलों में शानदार उपलब्धि हासिल की। उन्होंने सुरुचि सिंह के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम में गोल्ड जीता। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में 484.6 अंक बनाए। इस प्रदर्शन के साथ नया एशियाई खेल रिकॉर्ड भी बना।

हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। उनका पहला सपना एथलीट बनने का था। एक गंभीर चोट ने उनके ट्रैक करियर को रोक दिया। इसके बाद उन्होंने शूटिंग को अपना नया रास्ता बनाया।

एथलेटिक्स का सपना चोट से टूटा

रेवाड़ी के एक गांव से आने वाले कमलजीत बचपन में धावक बनना चाहते थे। उन्होंने ट्रैक एंड फील्ड में करियर बनाने की तैयारी शुरू की। वह स्प्रिंटर के तौर पर ट्रेनिंग कर रहे थे।

लेकिन 2019 में लगी गंभीर चोट ने सब बदल दिया। उस समय उनकी उम्र करीब 15 साल थी। चोट के कारण उन्हें एथलेटिक्स से दूर होना पड़ा।

खेल छोड़ने के बजाय उन्होंने नई शुरुआत करने का फैसला किया। इसी दौरान उनका रुख पिस्टल शूटिंग की ओर हुआ। यह उनके लिए बिल्कुल नया खेल था।

15 साल की उम्र में शुरू हुई शूटिंग

शूटिंग में शुरुआत के दौरान कई चुनौतियां सामने आईं। एथलेटिक्स के मुकाबले शूटिंग की तकनीक अलग थी। इसमें एकाग्रता और सटीक निशाने की जरूरत होती है।

उन्होंने धीरे-धीरे खेल की बारीकियां सीखनी शुरू कीं। शुरुआत में उन्होंने 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा पर ध्यान दिया। बाद में 10 मीटर एयर पिस्टल में भी अपनी जगह बनाई।

आर्थिक मुश्किलों के बीच जारी रखा सफर

शूटिंग का खर्च उनके परिवार के लिए आसान नहीं था। प्रशिक्षण, यात्रा और गोला-बारूद पर लगातार खर्च होता था। परिवार को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा।

एक समय ऐसा भी आया, जब उन्होंने शूटिंग छोड़ने पर विचार किया। हालांकि, परिवार ने उनका साथ नहीं छोड़ा। माता-पिता और चाचा ने उनकी मदद जारी रखी।

परिवार ने उनकी ट्रेनिंग के लिए अपनी बचत तक खर्च की। इस समर्थन ने उनके करियर को आगे बढ़ाने में मदद की।

गांव के कोच ने तैयार किया आधार

शुरुआती दौर में गांव के शूटिंग कोच ने उन्हें प्रशिक्षण दिया। कोच ने बुनियादी तकनीक से उनकी शुरुआत कराई। इसके बाद धीरे-धीरे उनका स्तर बेहतर होता गया।

परिवार और कोच का साथ उनकी यात्रा में महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने भी अभ्यास में लगातार मेहनत जारी रखी। इसी मेहनत से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

जूनियर स्तर पर मिली बड़ी सफलता

कमलजीत सिंह ने जूनियर स्तर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पहचान बनाई। 2023 में उन्होंने ISSF जूनियर विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। चांगवोन में उन्होंने 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया।

इसके बाद उन्होंने सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में कदम रखा। 10 मीटर एयर पिस्टल में भी उनका प्रदर्शन बेहतर हुआ। लगातार प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने में मदद की।

एशियाड में व्यक्तिगत स्पर्धा से निराशा

आइची-नागोया एशियाई खेलों में शुरुआत आसान नहीं रही। पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल क्वालिफिकेशन में वह नौवें स्थान पर रहे। वह व्यक्तिगत फाइनल से केवल एक अंक दूर रहे।

देश के लिए केवल दो खिलाड़ियों के फाइनल में पहुंचने के नियम का भी असर पड़ा। इसके बाद मिश्रित टीम स्पर्धा उनके लिए नया अवसर बनी।

आखिरी समय पर बदली मिश्रित टीम

सुरुचि सिंह के साथ उनकी जोड़ी पहले तय नहीं थी। बाद में टीम संयोजन में बदलाव किया गया। उन्हें मिश्रित टीम में सुरुचि के साथ उतारा गया।

यह बदलाव दोनों खिलाड़ियों के लिए अहम साबित हुआ। दोनों ने क्वालिफिकेशन में 587 अंक हासिल किए। इसमें 29 इनर-10 शामिल रहे। भारतीय जोड़ी ने क्वालिफिकेशन में शीर्ष स्थान हासिल किया।

कमलजीत सिंह ने मौके को बनाया यादगार

व्यक्तिगत स्पर्धा में फाइनल से बाहर होने के बाद उन्हें दूसरा अवसर मिला। उन्होंने सुरुचि के साथ मिलकर इस मौके का पूरा फायदा उठाया।

फाइनल में भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से बढ़त बनाए रखी। दक्षिण कोरिया की जोड़ी ने मुकाबला कड़ा करने की कोशिश की। इसके बावजूद भारतीय निशानेबाज बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।

484.6 अंक के साथ जीता गोल्ड

फाइनल में भारतीय जोड़ी ने 484.6 अंक हासिल किए। इस स्कोर के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दक्षिण कोरिया की जोड़ी 478.0 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रही।

ईरान ने 415.8 अंक के साथ कांस्य पदक जीता। भारतीय जोड़ी का 484.6 का स्कोर नया एशियाई रिकॉर्ड भी बना।

ट्रैक से शूटिंग रेंज तक बदली कहानी

कमलजीत सिंह की यात्रा एक खेल से दूसरे खेल तक पहुंचने की कहानी है। चोट ने उनका पहला सपना जरूर बदला। लेकिन उन्होंने खेल से अपना रिश्ता खत्म नहीं किया।

उन्होंने शूटिंग में नई शुरुआत की। आर्थिक मुश्किलों के बीच अभ्यास जारी रखा। परिवार और कोच के सहयोग ने उनका हौसला बनाए रखा।

जूनियर स्तर पर सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने सीनियर स्तर पर अपनी जगह बनाई। एशियाई खेलों में मिला दूसरा मौका उनकी बड़ी उपलब्धि बन गया।

संघर्ष के बाद हासिल हुआ सुनहरा मुकाम

  • 2019 में चोट के बाद एथलेटिक्स करियर रुका।
  • करीब 15 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की।
  • शुरुआती प्रशिक्षण गांव के कोच से मिला।
  • परिवार ने आर्थिक मुश्किलों के बावजूद साथ दिया।
  • 2023 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीता।
  • एशियाड में व्यक्तिगत फाइनल से बाहर रहे।
  • मिश्रित टीम में आखिरी समय पर मौका मिला।
  • सुरुचि के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड जीता।

एशियाड में रिकॉर्ड बनाने वाली जोड़ी

  • क्वालिफिकेशन में भारत ने 587 अंक बनाए।
  • भारतीय जोड़ी ने क्वालिफिकेशन में पहला स्थान पाया।
  • फाइनल में कुल 484.6 अंक हासिल किए।
  • दक्षिण कोरिया को 478.0 अंक मिले।
  • ईरान ने 415.8 अंक के साथ ब्रॉन्ज जीता।
  • फाइनल स्कोर नया एशियाई रिकॉर्ड बना।
  • भारत ने शूटिंग में अपना पहला गोल्ड जीता।

एक चोट ने बदला रास्ता, मंजिल नहीं

एथलेटिक्स का सपना चोट के कारण अधूरा रह गया। इसके बाद उन्होंने शूटिंग को अपनी नई पहचान बनाया। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उनका सफर जारी रहा।

जूनियर स्तर की सफलता ने उन्हें आगे बढ़ने का भरोसा दिया। सीनियर टीम तक पहुंचने के बाद एशियाड का मंच मिला।

व्यक्तिगत स्पर्धा में निराशा के बाद मिश्रित टीम में अवसर आया। इस अवसर को उन्होंने गोल्ड और रिकॉर्ड में बदल दिया। इस तरह ट्रैक से शुरू हुई कहानी शूटिंग रेंज में सुनहरे मुकाम तक पहुंची।



यह भी पढ़ें: जेन जी वोटर पर सियासत तेज, EC की भूमिका पर कांग्रेस ने उठाए बड़े सवाल