कर्नाटक की राजनीति में एक नई हलचल मच गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के गृह क्षेत्र गुरमितकल (जिला यादगीर) में पथ संचलन (रूट मार्च) निकालने की अनुमति मिल गई है।
यह आयोजन 1 नवंबर (शुक्रवार) को आरएसएस की शताब्दी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में होगा।

हालांकि, जिला प्रशासन ने इस आयोजन को मंजूरी देने के साथ 10 सख्त शर्तें भी लागू की हैं ताकि शांति और कानून व्यवस्था बनी रहे।

आरएसएस के पथ संचलन पर प्रशासन की 10 प्रमुख शर्तें:

  1. जुलूस निर्धारित मार्ग से ही निकाला जाएगा।
  2. किसी भी समुदाय या धर्म विशेष की भावना को ठेस पहुँचाने वाले नारे या भाषण की अनुमति नहीं होगी।
  3. जुलूस के दौरान सड़कें या दुकानें जबरन बंद नहीं कराई जाएंगी।
  4. हथियार, लाठी या घातक वस्तुएँ लेकर चलने की सख्त मनाही होगी।
  5. किसी भी तरह की उत्तेजक या विवादास्पद गतिविधि पर रोक रहेगी।
  6. नियमों का उल्लंघन होने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
  7. पथ संचलन के दौरान पुलिस बल की सख्त निगरानी रहेगी।

मार्च का मार्ग सम्राट सर्कल, एपीएमसी सर्कल, हनुमान मंदिर, मराठवाड़ी, पुलिस स्टेशन रोड, मिलन चौक और सिहिनेहरू बावी मार्केट रोड से होकर राम नगर तक रहेगा, जहां इसका समापन होगा।

राजनीतिक विवाद भी उभरा:

यह अनुमति ऐसे समय पर दी गई है जब राज्य मंत्री प्रियांक खरगे, जो मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे हैं, ने हाल ही में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर सरकारी संस्थानों में आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की थी।
उन्होंने कहा था कि आरएसएस सरकारी स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर शाखाएं लगाकर बच्चों और युवाओं में नकारात्मक विचार फैला रहा है।

इसके बाद राज्य सरकार ने तय किया कि किसी भी सरकारी संपत्ति पर कार्यक्रम करने के लिए प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

गौरतलब है कि मल्लिकार्जुन खरगे आठ बार गुरमितकल विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं।