छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के धमनागुड़ी और खरहरी गांवों में होली पर्व पारंपरिक स्वरूप में नहीं मनाया जाता। यहां पिछले लगभग एक शताब्दी से होलिका दहन की प्रथा स्थगित है और रंग-गुलाल का सामूहिक आयोजन नहीं किया जाता।

परंपरा की पृष्ठभूमि
ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्णय पूर्वजों की आस्था और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित है। गांव में होली के अवसर पर देव स्थल में पूजा-अर्चना की जाती है, किंतु अग्नि प्रज्वलन से परहेज किया जाता है।

घटना के बाद सख्ती
स्थानीय निवासियों के अनुसार कुछ वर्ष पूर्व एक परिवार द्वारा होली मनाने के प्रयास के बाद अप्रत्याशित घटना हुई थी। इसके बाद ग्राम समुदाय ने परंपरा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया।

नियम और सामाजिक अनुशासन
यदि कोई व्यक्ति गांव से बाहर रंग खेलकर लौटता है, तो उसे प्रवेश से पूर्व रंग धोना आवश्यक है। यह व्यवस्था आज भी प्रभावी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस परंपरा से सामाजिक शांति बनी हुई है।