रायपुर। कोरोना महामारी ने कई बच्चों के सिर से माता-पिता का साया छीन लिया। इसी तरह बालक सिद्धांत और संस्कृत से उनके पिता को छीनकर उनको बेसहारा कर दिया। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी दुलार योजना इन बच्चों का सहारा बनीं और उनके सुखद भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया। अब ये दोनों बच्चे स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल में मुफ्त पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही उन्हें हर महीने 500 रुपये की छात्रवृत्ति भी मिल रही है।
सिद्धांत और संस्कृत के पिता स्व. सौरभ तिवारी रायपुर में एक प्राइवेट जॉब करते थे और उनकी माता गृहणी हैं। कोरोना महामारी के दौर में विगत 14 अप्रैल 2021 को श्री तिवारी की मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद तिवारी परिवार की आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई। पहले दोनों बच्चे प्राइवेट अंग्रेजी स्कूल में पढ़ रहे थे। पिता के मौत के बाद उनकी शिक्षा में बाधा आ गई। इसी दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर छत्तीसगढ महतारी दुलार योजना लागू की गई।
तीसरी क्लास में मिला एडमिशन
इस योजना के तहत कोरोना से मरने वाले छत्तीसगढ़ के निवासियों के बेसहारा बच्चों को मुफ्त शिक्षा के साथ-साथ छात्रवृत्ति भी दी जा रही है। इसी के तहत इन बच्चों को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल चकरभाठा में कक्षा तीसरी में एडमिशन मिल गया।
सरकार का किया धन्यवाद
परिजनों का कहना है कि महतारी दुलार योजना छत्तीसगढ़ सरकार की अद्भुत योजना है। यह बेसहारा बच्चों का सबसे बड़ा सहारा बन रही है। सिद्धांत और संस्कृत की अंग्रेजी मीडियम स्कूल में अच्छी शिक्षा के लिए साल में 80 हजार रुपये फीस भरनी पड़ती थी, जो उनके पिता की मृत्यु के बाद संभव नहीं था। योजना से उन्हें जो मदद मिली है, इसके लिए वे सरकार के बहुत आभारी है।
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