मानसून में आंखों का संक्रमण से बचाव के उपाय दिखाती तस्वीर

बारिश के मौसम में नमी और उमस के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं, और इसका सीधा असर आंखों की सेहत पर पड़ता है। अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों आंखों में लालिमा, खुजली और पानी बहने की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में आंखों का संक्रमण, खासकर कंजंक्टिवाइटिस यानी आंख आना, सबसे आम समस्याओं में से एक है, जो सही सावधानी न बरतने पर पूरे परिवार में तेजी से फैल सकती है।

समस्या क्या है और यह क्यों होती है

मानसून में हवा में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया, वायरस और फंगस को पनपने का माहौल मिल जाता है। बारिश के गंदे पानी के छींटे, प्रदूषित हवा और आंखों को बार-बार हाथ से छूना संक्रमण फैलने की सबसे बड़ी वजहें हैं। कंजंक्टिवाइटिस के अलावा इस मौसम में स्टाई (आंख की पलक पर होने वाली फुंसी), केराटाइटिस और ब्लेफेराइटिस जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। इनके लक्षणों में आंखों का लाल होना, खुजली, जलन, पानी या चिपचिपा स्राव निकलना और तेज रोशनी में असहजता महसूस होना शामिल है।

तुरंत समझें: मानसून में आंखों का संक्रमण कैसे रोकें

हाथों को बार-बार साबुन से धोना, आंखों को छूने से बचना, तौलिया या रुमाल किसी के साथ साझा न करना और बारिश में बाहर निकलते समय चश्मा पहनना — ये चार आदतें मानसून में आंखों के संक्रमण को काफी हद तक रोक सकती हैं। लक्षण दो दिन से ज्यादा बने रहने पर आंखों के डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

बचाव के आसान और असरदार तरीके

  • हाथों की सफाई का सबसे ज्यादा ध्यान रखें, दिन में कई बार साबुन-पानी से हाथ धोएं।
  • आंखों को गंदे हाथों से रगड़ने या मलने की आदत से पूरी तरह बचें।
  • तौलिया, रुमाल, काजल या आई मेकअप का सामान किसी दूसरे के साथ साझा न करें।
  • बारिश में बाहर निकलते समय हल्के चश्मे का इस्तेमाल करें, ताकि बारिश का गंदा पानी और धूल-मिट्टी सीधे आंखों में न जाए।
  • रुमाल की जगह डिस्पोजेबल टिश्यू का इस्तेमाल करें, ताकि बार-बार इस्तेमाल होने वाला कपड़ा संक्रमण का कारण न बने।
  • अगर घर में किसी को कंजंक्टिवाइटिस हो गया है, तो उसका तकिया, चादर और तौलिया अलग रखें और नियमित रूप से गर्म पानी से धोएं।
  • कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को संक्रमण के दौरान लेंस का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
  • आंखों में हल्की जलन होने पर साफ, ठंडे पानी से आंखें धोना राहत दे सकता है, लेकिन बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी आई ड्रॉप खुद से इस्तेमाल न करें।

लक्षण दिखने पर क्या करें

अगर आंखों में लालिमा, सूजन, तेज दर्द या रोशनी की सामान्य से ज्यादा संवेदनशीलता महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। शुरुआती दो दिनों में लक्षण कम न हों तो नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाना जरूरी है, क्योंकि समय पर इलाज न होने पर संक्रमण आंख की गहरी परतों तक पहुंचकर दृष्टि को भी प्रभावित कर सकता है। बच्चों और बुजुर्गों में यह समस्या तेजी से बढ़ सकती है, इसलिए उनकी आंखों पर खास नजर रखें और स्कूल या भीड़भाड़ वाली जगहों पर भेजने से पहले लक्षण पूरी तरह ठीक होने का इंतजार करें।

पोषण और जीवनशैली से भी मिलेगी मदद

विटामिन ए और सी से भरपूर खाना, जैसे गाजर, पपीता, संतरा और हरी पत्तेदार सब्जियां, आंखों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती हैं। पर्याप्त पानी पीना और नींद पूरी लेना भी शरीर की समग्र इम्युनिटी के लिए जरूरी है, जिसका असर आंखों की सेहत पर भी पड़ता है। स्क्रीन टाइम को सीमित रखें और लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप देखने के बीच आंखों को आराम जरूर दें।

अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और यह चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें, खासकर यदि लक्षण गंभीर हों या लंबे समय तक बने रहें।

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