विष्णु देव साय समाचार

छत्तीसगढ़ के पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। ताजा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समाचार के अनुसार, सीएम ने सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड में स्थित ऐतिहासिक रामवनगमन पर्यटन परिपथ के प्रमुख केंद्र रामगढ़ का विस्तृत दौरा किया।

दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव का सफल समापन

दरअसल, सरगुजा में आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री शामिल हुए। वहीं, इस दौरान उन्होंने प्राचीनतम धरोहरों का निरीक्षण कर उनके ऐतिहासिक महत्व पर शोध आधारित विकास करने के निर्देश दिए।

सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफा का सांख्यिकीय महत्व

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समाचार के माध्यम से इस क्षेत्र की स्थापत्य कला की विशिष्टता सामने आई है। दरअसल, इस ऐतिहासिक स्थल में मुख्य रूप से तीन पुरातात्विक संरचनाएं शामिल हैं:

धरोहर का नामलंबाई / आयामऐतिहासिक कालखंड / विशेषता
सीताबेंगरा गुफालगभग 44 फीट लंबीविश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला (रंगमंच)
जोगीमारा गुफातीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्वप्राचीन भित्तिचित्र एवं मौर्यकालीन अभिलेख
हाथीपोल सुरंगलगभग 180 फीट लंबी15-20 फीट ऊंची प्राकृतिक जल-प्रवाह सुरंग

कालिदास के मेघदूतम् से जुड़ा साहित्यिक इतिहास

हालांकि, इस स्थल का केवल पुरातात्विक महत्व ही नहीं है, बल्कि साहित्यिक जुड़ाव भी गहरा है। दरअसल, माना जाता है कि महाकवि कालिदास ने ‘मेघदूतम्’ की रचना इसी स्थान पर की थी, जिसका प्रारंभ ‘आषाढस्य प्रथमदिवसे’ से होता है।

आषाढ़ के प्रथम दिवस पर आयोजन की परंपरा

इसलिए ऐतिहासिक और साहित्यिक स्मृतियों को संजोने के लिए हर साल आषाढ़ के पहले दिन इस मेले का आयोजन होता है। नतीजतन, यह स्थल देश के शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनता है।

तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की चित्रकला

वहीं, जोगीमारा गुफा में मौजूद भित्तिचित्रों को भारत की सबसे प्राचीन चित्रकला परंपरा माना जाता है। इसलिए इस क्षेत्र का संरक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप करने की योजना है।

हाथीपोल सुरंग की अनूठी भूगर्भीय संरचना

इसके अलावा, रामगढ़ पर्वत की ढलान पर स्थित हाथीपोल नामक प्राकृतिक सुरंग भूगर्भीय दृष्टि से अद्भुत है। कुल मिलाकर, वर्षों तक हुए निरंतर जल प्रवाह के कारण यह विशाल सुरंग अपने आप निर्मित हो गई।

धार्मिक एवं रामायणकालीन मान्यताओं का समावेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समाचार के अंतर्गत यह बात भी प्रमुखता से उभरी कि इन कलात्मक गुफाओं का संबंध सीधे रामायण काल से है। इसलिए यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का एक बड़ा हब बनने की क्षमता रखता है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन का विकास

दरअसल, मुख्यमंत्री का मानना है कि इन धरोहरों के संवर्धन से छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासियों को स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे। खास तौर पर हस्तशिल्प और गाइड के रूप में युवाओं को काम मिलेगा।

प्रशासनिक अमले की सक्रिय उपस्थिति

इसी बीच, कार्यक्रम के दौरान संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल और कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने भी पर्यटन विकास के रोडमैप पर अपनी बात रखी। नतीजतन, आने वाले समय में यहां बुनियादी सुविधाओं का और विस्तार किया जाएगा।