हस्त और चित्रा नक्षत्र के सुयोग में आज नाग पंचमी और तक्षक पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। नाग पंचमी का त्यौहार काल सर्प वाले जातकों की पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन जीवित सांपों की भी पूजा की जाती है। नागों के शिरोमणि भगवान महादेव हैं। श्रावण मास की पंचमी तिथि को शुक्ल पक्ष में यह पर्व मनाया जाता है।

नाग देवता भगवान शिव के गले का श्रृंगार हैं। भगवान शिव के गले की शोभा बढ़ाते हैं। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। सावन के महीने में प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

हिन्दू संस्कृति ने पशु-पक्षी, वृक्ष-वनस्पति सबके साथ आत्मीय संबंध जोड़ने का प्रयत्न किया है। हमारे यहां गाय की पूजा होती है। कई बहनें कोकिला-व्रत करती हैं। कोयल के दर्शन हो अथवा उसका स्वर कान पर पड़े तब ही भोजन लेना, ऐसा यह व्रत है। हमारे यहां वृषभोत्सव के दिन बैल का पूजन किया जाता है। वट-सावित्री जैसे व्रत में बरगद की पूजा होती है। हमारी यही संस्कृति महान सनातन परंपरा की परिचायक है।

आप सभी को नागपंचमी की शुभकामनाएं ।