जशपुर जिले के गुतकिया गांव में वर्षों से निष्क्रिय पड़ी सिंचाई व्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए नहर मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया गया है। जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की पहल से अब किसानों को नियमित सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। यह परियोजना कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने और किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मनरेगा के सहयोग से पूरा हुआ कार्य
करीब 12 लाख रुपये की लागत से नहर मरम्मत का कार्य मनरेगा के तहत कराया गया। इस कार्य के माध्यम से पुरानी सिंचाई संरचना को फिर से उपयोग के योग्य बनाया गया है। प्रशासन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी परियोजनाएं किसानों की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा देती हैं। इससे विकास और रोजगार दोनों उद्देश्यों की पूर्ति होती है।
किसानों को मिलेगा दोहरी फसलों का लाभ
नहर की मरम्मत के बाद लगभग 100 एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने लगेगी। इससे किसान केवल खरीफ फसल पर निर्भर नहीं रहेंगे बल्कि रबी सीजन में भी खेती कर सकेंगे। वर्षभर पानी उपलब्ध होने से खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों को अधिक आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। यह बदलाव क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक होगा।
फसल विविधीकरण को मिलेगा प्रोत्साहन
बेहतर सिंचाई व्यवस्था के कारण नहर मरम्मत का लाभ केवल धान उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि विभाग किसानों को दलहन, तिलहन और अन्य लाभकारी फसलों की खेती के लिए भी प्रेरित कर रहा है। इससे खेती अधिक लाभदायक बनेगी और किसानों को बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने का अवसर मिलेगा।
ग्रामीण विकास की दिशा में बड़ा कदम
स्थानीय किसानों के अनुसार नहर की मरम्मत से क्षेत्र में कृषि विकास और जल प्रबंधन की स्थिति बेहतर होगी। आदिवासी अंचल के किसानों को इसका विशेष लाभ मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। यह परियोजना ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरी है।
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