उत्तर-पश्चिम भारत में वर्तमान समय में दो सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के कारण मौसम में उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज किया जा रहा है। इस प्रणाली के प्रभाव से पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी तथा मैदानी इलाकों में वर्षा की गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे तापमान में गिरावट आई है।
वर्षा और बर्फबारी का क्षेत्रीय प्रभाव
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, मेघालय और त्रिपुरा में कई स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, ओडिशा और झारखंड सहित विभिन्न राज्यों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा हुई है।
हवाओं और ओलावृष्टि का असर
रिपोर्ट के अनुसार, कई क्षेत्रों में 50 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई, जिससे कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
पूर्वानुमान और आगामी स्थिति
मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि आगामी दिनों में तीसरा पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हो सकता है। इसके चलते 10 अप्रैल तक मौसम में अस्थिरता बनी रह सकती है। पूर्वोत्तर राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है।
आपदा प्रबंधन और बचाव कार्य
जम्मू-कश्मीर में भारी वर्षा के कारण उत्पन्न बाढ़ जैसी स्थिति में फंसे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए संयुक्त बचाव अभियान चलाया गया, जिसमें सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन ने समन्वित प्रयास किए।
