सबसे पहले भाई दूज की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं आज भाई दूज का पावन पर्व है . जो की भाई-बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है. और इस त्योहार को देशभर के कई हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. यह त्योहार गोवर्धन के अगले दिन आता है. और इस बार यह शनिवार के दिन पड़ रहा है. मान्यता है कि भाई-दूज के दिन बहनें अपने भाई को तिलक कर उसकी लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं. भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है और इस दिन से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित है. यह भी कहा जाता है कि भाई-दूज के दिन बहनों को कथा सुनने के बाद ही तिलक करना चाहिए.

पौराणिक कथा
भाई दूज से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित है. उनमें से एक इस प्रकार है. सूर्य की पत्नी संज्ञा से दो संताने थी. पुत्र का नाम यमराज और पुत्री का नाम यमुना था. संज्ञा सूर्य का तेज सहन न कर पाने के कारण अपनी छायामूर्ति का निर्माण कर उन्हें ही अपने पुत्र-पुत्री को सौंपकर वहाँ से चली गई. छाया को यम और यमुना से अत्यधिक लगाव नहीं था, लेकिन यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह करती थीं. यमुना अपने भाई यमराज के यहां प्राय: जाती और उनके सुख-दुख की बातें पूछा करती तथा यमुना, यमराज को अपने घर पर आने के लिए भी आमंत्रित करतीं, किंतु व्यस्तता तथा अत्यधिक दायित्व के कारण यम यमुना के घर नहीं जा पाते थे.

एक बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहन यमुना के घर अचानक जा पहुंचे. बहन के घर जाते समय यमराज ने नरक में निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया. बहन यमुना ने अपने भाई का बड़ा आदर-सत्कार किया. विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए और उन्हें भोजन कराया तथा तिलक लगाया. यमराज ने चलते वक्त बहन यमुना से मनवांछित वरदान मांगने को कहा. इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है।

यमुना ने कहा कि यदि आप मुझे वर देना ही चाहते हैं तो यही वर दीजिए कि आज के दिन प्रत्येक वर्ष आप मेरे यहां आया करेंगे और मेरा आतिथ्य स्वीकार किया करेंगे. इसी प्रकार जो भाई अपनी बहन के घर जाकर उसका आतिथ्य स्वीकार करे तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन खिलाये, उसे आपका भय न रहे. इसी के साथ उन्होंने यह भी वरदान दिया कि यदि इस दिन भाई-बहन यमुना नदी में डुबकी लगाएंगे तो वे यमराज के प्रकोप से बच पाएंगे. यमुना की प्रार्थना को यमराज ने स्वीकार कर लिया. तभी से इस दिन भाई दूज के नाम से मनाया जाता है.