रायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अपने उद्देश्यों को बखूबी पूरा करने में सफल हो रही है। मनरेगा के तहत डबरी निर्माण यहां के लोगों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया भी बन रहा है। ऐसे ही एक युवा ने अपनी आय को बढ़ाने के लिए मनरेगा के तहत बने इस डबरी में मछली पालन किया। जिससे अब उसे अच्छी खासी आय हो रही है।

पिछड़े और वनांचल क्षेत्र में रह रहे ग्रामीणों को मनरेगा के तहत लगातार रोजगार का अवसर मिल रहा है। ये योजना ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का आधार साबीत हुई है।

आर्थिक संकट से जूझ परिवारों को उबारा

ग्राम पंचायत धनेलीकन्हार के शंकर बताते हैं कि उन्होंने 1 हेक्टेयर भूमि का चयन किया जिसपर उन्होंने 2.91 लाख की लागत से डबरी निर्माण कराया। उन्होंने बताया कि पहले कृषि ही उनके आय का एकमात्र स्त्रोत था। जिसमें उन्हें अपने परिवार को आर्थिक रूप से उपर लाने में परेशानी हो रही थी। शंकर ने बताया कि उनकी आय बेहद कम थी, क्योंकि खेती के लिए वे बारिश पर ही निर्भर थे। साथ ही सूखे प्राकृतिक आपदाओं के चलते भी उन्हें आर्थिक समस्या से दो चार होना पड़ रहा था। अब इस स्थिति में कृषि संबंधित जरुरी उपकरण खरीदना उनके लिए संभव नहीं था, न ही वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रहे थे और तंगी की वजह से स्वास्थ्यगत समस्याओं से भी जूझ रहे थे। ऐसे में भूपेश सरकार की ओर से चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाएं इन परिवारों के लिए सराहा बनीं।

ग्रामीणों ने जताया आभार

शंकर ने बताया कि मनरेगा के तहत उन्होंने अपनी 1 एकड़ जमीन पर डबरी निर्माण कराया और इसमें मछली पालन करने लगे। इसके अलावा उन्होंने डबरी के पानी का इस्तमाल सिंचाई के लिए भी किया। पहले वे अपने खेत से एक ही फसल ले पाते थे, अब पानी की पर्याप्त उपलब्धता से वे एक साथ कई फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने राज्य शासन को लोगों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए मनरेगा जैसी योजना लागू करने के लिए धन्यवाद दिया। इसके अलावा शंकर ने दूसरे किसानों को भी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का फायदा उठाने को कहा जिससे कि वे अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकें।