• राज्य सरकार की व्यवस्थाओं पर पलीता लगा रही केंद्र सरकार
  • प्रदेश सरकार ने किसानों की सुगमता को देखते हुए एक साथ जारी किए टोकन

प्रदेश में आज से धान खरीदी शुरू हो गई है। भूपेश सरकार की नीतियों के चलते साल दर साल धान खरीदी के लिए पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही है। खरीदी विपणन वर्ष 2021-22 के लिए 22 लाख से ज्यादा किसानों ने पंजीयन करवाया है। इनसे 2 हजार 399 सहकारी समितियों में धान खरीदा जाएगा। सरकार ने इस साल पंजीकृत किसानों से ही 105 लाख टन यानी 1 करोड़ 5 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है। इसीलिए किसानों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने धान खरीदी केंद्रों की संख्या बढ़ाते हुए 88 नए केंद्र शुरू किए हैं। लेकिन राज्य सरकार की इन तमाम व्यवस्थाओं पर केंद्र सरकार पलीता लगा रही है।

राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए व्यवस्थित रूप से टोकन जारी करने सहकारी समितियों को नया निर्देश भी मिला है। कोरोना प्रोटोकॉल और पिछले दिनों कवर्धा में हुई घटना को देखते हुए सीमांत, लघु और बड़े किसानों को 15 दिन पहले तक का टोकन जारी करने का निर्देश दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि इन किसानों को पात्रता के मुताबिक अपने उत्पादित धान विक्रय समय-सीमा में करने के लिए 15 दिन पहले तक का टोकन कानून व्यवस्था की स्थिति और कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए जारी किया जाए।

सुगमतापूर्वक खरीदी की व्यवस्था

शासन द्वारा जारी पत्र में इस बात का ध्यान रखने को कहा गया है कि समिति में रजिस्टर्ड किसानों के धान की सुगमतापूर्वक खरीदी हो। इसके लिए व्यवस्थित रूप से टोकन जारी किया जाए। पत्र में यह भी कहा गया है कि समिति में रविवार से शुक्रवार तक सुबह 9.30 बजे से शाम 5 बजे तक टोकन जारी किया जाए। खरीदी केंद्र के अंतर्गत आने वाले ग्रावों को दिनवार कौन-कौन से गांव के किसान टोकन जारी करा सकेंगे, यह समिति स्तर पर निर्धारित कर सूचना समिति में प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं।

ये है सरकार की रेट लिस्ट

जानकारी के मुताबिक सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कॉमन धान 1940 रुपये और ग्रेड-ए के धान 1960 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का लक्ष्य पूरा करने के लिए 5.25 लाख गठान बारदानों की जरूरत है। लेकिन सरकार के पास सिर्फ 86 हजार गठान बारदाने ही हैं। वहीं, मक्का की खरीदी भी आज से शुरू हो गई है। मक्के के लिए 1870 रुपये प्रति क्विंटल की राशि तय की गई है।

किसानों पर बारदाने का बोझ

प्रदेश में तकरीबन हर सहकारी समिति आसपास के तीन-चार गांवों का धान खरीदेगी। हर फड़ में 40 से 50 हजार क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन प्रदेश के खरीदी केंद्र फिलहाल बारदानों (जूट का बोरा) की कमी से जूझ रहे हैं और इसका ठीकरा भी विपक्ष राज्य सरकार पर ही फोड़ रहा है। अब बारदाना उपलब्ध कराना तो केंद्र के दायरे में आ जाता है। इसके बावजूद इसके लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराना समझ से परे है। बारदाने की कमी को ऐसे समझिए कि यदि किसी किसान को 10 क्विंटल धान बेचना है, तो उसे 25 बारदाने (40 किलो के हिसाब से) लगेंगे। इसमें से 25 फीसदी यानी 7 बारदाना किसान को खुद लाना होगा। इसका मतलब इन 7 बारदानों की कीमत का बोझ भी किसानों पर पड़ेगा। अब इस स्थिति में किसानों के लिए बारदाना बाजार से खरीदने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।

केंद्र सरकार बाधित करना चाहती है धान खरीदी- सीएम

धान खरीदी के मामले पर केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर भी काफी विवाद है। प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल भी इसे लेकर लगातार केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते आए हैं। सीएम का आरोप है कि केंद्र सरकार शुरू से धान खरीदी रोकने की साजिश कर रही है। इसका अंदाजा इसी से लगा लिजिए कि छत्तीसगढ़ को 5 लाख गठान बारदानों की जरूरत है लेकिन अभी तक प्रदेश को एक लाख गठान बारदाना भी नहीं मिल पाया है। सीएम ने इसके लिए पीएम से मिलने का समय भी मांगा, लेकिन हफ्ते भर बाद भी पीएमओ ने अब तक समय नहीं दिया है। मानो जैसे किसानों की समस्या के संबंध में केंद्र कुछ सुनना ही नहीं चाहता हो। लेकिन केंद्र की इन बाधाओं से पार करते हुए सीएम भूपेश ने धान खरीदी में कोई रुकावट नहीं आने का दावा किया है।

केंद्र ने तोड़ा भरोसा

धान खरीदी के लिए कुल 5.25 लाख गठान बारदानों की जरूरत है। इसके खिलाफ केंद्र सरकार ने राज्य को 2 लाख 14 हजार गठान सप्लाई का भरोसा दिया था। लेकिन जूट कमिश्नर ने अब तक सिर्फ 86 हजार जूट बारदाने ही उपलब्ध कराएं हैं। बारदानों की कमी को दूर करने के लिए पीडीएस और मिलरों से एक लाख गठान बारदाने की व्यवस्था की गई है, साथ ही बाजार से करीब 1.13 लाख गठान एचडीपीई-पीपी बारदाने की व्यवस्था भी की जा रही है।