पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। पाकिस्तान सेना ने आरोप लगाया है कि अफगान तालिबान सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय आतंकियों और तस्करों को पाकिस्तान में प्रवेश कराने में सीधा सहयोग कर रहा है। सेना का दावा है कि अफगान सीमा चौकियाँ न केवल पाकिस्तानी सैन्य पोस्टों पर फायरिंग कर रही हैं, बल्कि उसी दौरान आतंकियों को सुरक्षित पार कराने के लिए कवर भी प्रदान कर रही हैं।

आईएसपीआर प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बताया कि सीमा पर होने वाली फायरिंग पूरी तरह समन्वित होती है और इन हमलों का उद्देश्य पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाने के साथ-साथ तस्करों और आतंकियों को प्रवेश दिलाना होता है। उन्होंने कहा कि कई बार पोस्टों पर रॉकेट दागकर नीचे से वाहन गुजारे जाते हैं, जिससे सुरक्षा बलों के लिए प्रतिक्रिया देना मुश्किल हो जाता है।

पाक-अफगान सीमा करीब 2,500 किलोमीटर लंबी है, जिसके कारण इसे पूरी तरह सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण है। पाक सेना का कहना है कि 15–25 किलोमीटर की दूरी पर सैन्य चौकियाँ स्थापित होने के बावजूद लंबी सीमा पर पूर्ण नियंत्रण लगभग असंभव है। यही कारण है कि अवैध घुसपैठ और तस्करी को रोकना अब भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।

जनरल चौधरी ने बताया कि 4 नवंबर से अब तक 4,910 खुफिया अभियानों को अंजाम दिया गया है, यानी औसतन प्रतिदिन 233 अभियान। इन कार्रवाइयों में 206 आतंकियों को मार गिराया गया है। जनवरी 2025 से अब तक सुरक्षा बलों ने राष्ट्रव्यापी 67,023 अभियान चलाए हैं, जिनमें बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा मुख्य केंद्र रहे हैं।

पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान टीटीपी को सुरक्षित पनाह देता आ रहा है, जिसके कारण दोनों देशों के संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। हाल ही में संघर्षविराम की बातचीत हुई थी, लेकिन पाकिस्तानी सेना के अनुसार यह तभी प्रभावी हो सकता था यदि अफगान तालिबान हमलों और घुसपैठ को रोकता — जो अब तक नहीं हुआ।

वर्तमान हालात ने क्षेत्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आतंकवाद विरोधी कोशिशों पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। यदि तनाव कम नहीं हुआ तो इसके परिणाम पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़ सकते हैं।