अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के कई लोक कलाकार शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कलाकारों की मांग पर प्रत्येक दल को 25 हजार रुपये देने की घोषणा की। इस फैसले से पंडवानी, पंथी और आदिवासी नृत्य से जुड़े दलों को आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा।
कार्यक्रम का आयोजन ज्ञानश्रोत कला मंच ने किया। मुख्यमंत्री ने मंच के 46 वर्षों के सांस्कृतिक योगदान की सराहना की। उन्होंने पद्मश्री डॉ. उषा बारले और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।
तीजन बाई की विरासत को आगे बढ़ाने की तैयारी
पद्म विभूषण तीजन बाई ने अपनी प्रस्तुतियों से छत्तीसगढ़ की लोककला को देश और विदेश में पहचान दिलाई। उनकी कला में गायन, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के जरिए महाभारत की कथाएं प्रस्तुत की जाती थीं।
राज्य सरकार उनके सम्मान में लोककला अलंकरण शुरू करेगी। इसके अलावा, गनियारी को कला ग्राम बनाने और स्थानीय हाईस्कूल का नाम तीजन बाई के नाम पर रखने की पहल होगी। इन योजनाओं का उद्देश्य लोककला की विरासत को संरक्षित करना है।
शिक्षा और सड़क सुविधाओं को लेकर भी घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने बानबरद के मिडिल स्कूल को हाईस्कूल में उन्नत करने की घोषणा की। अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड का निर्माण भी प्रस्तावित है। इन कार्यों से क्षेत्र की शिक्षा और आवागमन सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
छत्तीसगढ़ी सिनेमा को बढ़ावा देने की योजना
राज्य में स्थानीय कलाकारों को नए अवसर देने के लिए छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड बनाया गया है। नवा रायपुर में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम हो रहा है। इससे फिल्म निर्माण और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने पंडवानी, पंथी, भरथरी, ददरिया और सुवा जैसी लोकविधाओं के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम में विधायक रिकेश सेन, ललित चंद्राकर और ईश्वर साहू सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।