छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सहकारिता को मिला बढ़ावा
सहकारी आंदोलन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ राज्य का गठन वरदान साबित हुआ है। राज्य निर्माण के 20 सालों में प्रदेश में सहकारिता का महत्व काफी बढ़ा है। विशेषकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में सहकारिता के क्षेत्र को काफी बढ़ावा मिला। छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का काम सहकारी समितियों के माध्यम से ही किया जाता है। इसी तरह सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली का जिम्मा भी सहकारी क्षेत्र को दिया है। शासन ने मृतप्राय समितियों को पुनर्जीवित किया है, इस योजना के तहत सहकारी समितियों को सहायता राशि भी दी गई।
सहकारी आंदोलन को बढ़ावा मिलने से कृषि क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है तथा किसानों एवं ग्रामीणों के लिए सहकारिता के माध्यम से ज्यादा सुविधाएं मिलने लगी है । यही वजह है कि कृषि क्षेत्र में फसल ऋण लेने वाले कृषकों की संख्या जो राज्य गठन के समय वर्ष 2000-01 में मात्र 3,95,672 थी, वो अब बढ़कर करीब 12 लाख से ज्यादा हो गई है। सहकारिता कानून आम जनता को समझ में नहीं आते थे जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानी होती थी। कांग्रेस सरकार के आते ही इन कानूनों को सरलीकरण किया गया है। ताकि आम जनता को भी यह आसानी से समझ में आए और उनके लिए सहकारिता से लाभ उठाना आसान हो।
सहकारिता का महत्व बढ़ा
छत्तीसगढ़ पहला ऐसा राज्य है जिसने सहकारिता के महत्व को समझा यहां सोसाइटी के माध्यम से धान की खरीदी आरंभ हुई जिसके लिए वासुदेव चंद्राकर का बहुत बड़ा योगदान है। कांग्रेस सरकार ने किसानों के लिए न केवल कर्ज माफी की अपितु साथ ही सिंचाई कर भी माफ किया। भूमिहीन कृषकों के लिए योजना शुुरू की गई है। राज्य सरकार ने नरवा गरवा घुरवा बाड़ी के माध्यम से हम तेजी से ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। गौठान आत्मनिर्भर ग्रामीण आजीविका केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं जिससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार की नई संभावनाएं विकसित हो रही है। इन सबका क्रियान्वयन समितियिों के माध्यम से ही किया जा रहा है। कांग्रेस सरकार आने के बाद अब धान खरीदी केंद्रों की संख्या को 2000 से बढ़कर 2300 हो गई है। इसके साथ ही पहले किसानों को तहसील केंद्र तक आने में काफी दूरी तय करनी पड़ती थी। हमने नए तहसील बनाए और अब 222 तहसीलों के माध्यम से किसानों को सुविधा आसान हो गई है।
फसल ऋण वितरण
प्रदेश में कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से चालू वित्तीय वर्ष में खरीफ फसल के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर 4530 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया है। छत्तीसगढ राज्य निर्माण के समय वर्ष 2000-01 में मात्र 190 करोड रुपए का ऋण वितरित किया गया था जो अब 28 गुणा से अधिक हो गया है। चालू वर्ष में 5300 करोड़ रुपए का ऋण बांटने का लक्ष्य तय किया गया है। ऋण के रूप में किसानों को इस वर्ष खरीफ सीजन में 7,25,000 मिट्रिक टन रासायनिक खाद का वितरण किया गया है।
किसान क्रेडिट कार्ड
किसानों की सुविधा के लिए सहकारी समितियों में किसान क्रेडिट कार्ड योजना लागू की गई है। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कृषक सदस्यों को 5 लाख रुपये तक के ऋण उपलब्ध कराये जा रहे है। कुल समितियिों के क्रियाशील सदस्यों में से आधे से अधिक सदस्यों को अब तक किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराये जा चुके है जो कि कुल क्रियाशील सदस्यों का 58.67 प्रतिशत है। वहीं किसानों को रूपे केसीसी कार्ड जारी किये जा चुके हैं ।
धान खरीदी ऑनलाइन
शासन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जिम्मेदारी भी सहकारी समितियों को दी है। इसके लिए 1989 कम्प्यूटराईज्ड धान खरीदी केन्द्र स्थापित किये गये हैं। धान उपार्जन केन्द्रों के कम्प्यूटराईजेशन से खरीदी व्यवस्था में व्यवस्थित और पारदर्शी हो गई है। किसानों को धान का भुगतान ऑनलाईन किया जाता है । किसानों का ऋण अदायगी के लिए लिकिंग की सुविधा प्रदान की गई है। इससे सहकारी समितियां भी लाभान्वित हो रही है, क्योंकि लिकिंग के माध्यम से ऋण की वसूली आसानी से हो रही है।
भूमिहीन कृषकों को ऋण प्रदाय
सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को टैक्टर हार्वेस्टर के अलावा आवास ऋण भी प्रदाय किया जा रहा है। नाबार्ड के निर्देशानुसार अब ऐसे भूमिहीन कृषकों को भी ऋण प्रदाय किया जा रहा है जो अन्य किसानों की भूमि को अधिया या रेगहा लेकर खेती करते है। छत्तीसगढ़ की यह प्राचीन परंपरा है। जब कोई किसान खेती नहीं कर सकता अथवा नहीं करना चाहता तो वह अपनी कृषि योग्य भूमि को अधिया या रेगहा में कुछ समय सीमा के लिए खेती करने हेतु अनुबंध पर दे देता है। चूंकि अधिया या रेगहा लेकर खेती करने वाले किसानों के नाम पर जमीन नहीं होती इसलिए उन्हें समितियों से ऋण नहीं मिल पाता था, लेकिन ऐसे अधिया या रेगहा लेने वाले किसानों का “संयुक्त देयता समूह” बना कर सहकारी समितियों से ऋण प्रदान करने की योजना बनाई गई है।
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