प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ महोत्सव की प्रशंसा करते हुए इसे बस्तर के बदलते दौर का प्रतीक बताया है। सोशल मीडिया पर साझा अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी माओवाद, हिंसा और पिछड़ेपन से जुड़ी पहचान रखने वाला बस्तर अब समृद्ध संस्कृति, जनजातीय विरासत और विकास की नई कहानी गढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सात से नौ फरवरी तक आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ महोत्सव ने बस्तर की लोक परंपराओं, आदिवासी नृत्यों, संगीत और सांस्कृतिक धरोहर को देश के सामने मजबूती से प्रस्तुत किया है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि बस्तर अब नकारात्मक छवि से बाहर निकलकर आत्मविश्वास और सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ चुका है।

उन्होंने याद दिलाया कि एक समय था जब बस्तर का नाम आते ही माओवाद और हिंसा की तस्वीरें उभरती थीं, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस सफल आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ के लोगों और कलाकारों को बधाई दी और आशा जताई कि आने वाले वर्षों में बस्तर शांति, पर्यटन और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमुख केंद्र बनेगा।

गौरतलब है कि ‘बस्तर पंडुम’ के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे। उन्होंने घोषणा की थी कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का पूरी तरह अंत कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बस्तर अब “बंदूक और गोली” की जगह “पर्यटन और संस्कृति” के लिए पहचाना जाएगा।

छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल का उद्देश्य बस्तर संभाग की जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करना और स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। इस वर्ष हजारों आदिवासी कलाकारों की भागीदारी ने ‘बस्तर पंडुम’ को ऐतिहासिक और यादगार बना दिया।