पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हिजबुल्ला प्रमुख शेख नईम कासिम का नया बयान चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा है कि संगठन किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें सैन्य गतिविधियों को पूरी तरह रोकने की शर्त शामिल न हो। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में शांति बहाली के लिए कई स्तरों पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
पूर्ण युद्धविराम को बताया शांति का एकमात्र रास्ता
हिजबुल्ला प्रमुख ने स्पष्ट किया कि केवल सीमित सैन्य विराम से स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। उनके अनुसार, पूर्ण युद्धविराम की मांग का उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता स्थापित करना और आगे के संघर्षों को रोकना है। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते में सभी पक्षों की सैन्य गतिविधियां पूरी तरह बंद होनी चाहिए।
ईरान और प्रतिरोधी गुटों को लेकर क्या बोले कासिम?
मध्य अशूरा परिषद को संबोधित करते हुए शेख नईम कासिम ने कहा कि ईरान ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है। उन्होंने दावा किया कि प्रतिरोधी गुटों को कमजोर करने की कोशिशें सफल नहीं हुईं और क्षेत्र में नए राजनीतिक समीकरण उभर रहे हैं।
अमेरिका और इस्राइल पर लगाए गंभीर आरोप
कासिम ने आरोप लगाया कि लेबनान में जारी सैन्य अभियानों को अमेरिकी समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की भूमिका के बिना मौजूदा स्तर का संघर्ष संभव नहीं था। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि पूर्ण युद्धविराम की मांग को नजरअंदाज करना क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा दे सकता है।
युद्धविराम प्रस्तावों को लेकर हिजबुल्ला की आपत्ति
हिजबुल्ला ने उन प्रस्तावों पर आपत्ति जताई है जिनमें इस्राइल को कुछ सैन्य गतिविधियां जारी रखने की अनुमति मिलती है। संगठन का मानना है कि ऐसे प्रस्ताव वास्तविक शांति स्थापित करने के बजाय संघर्ष को लंबा खींच सकते हैं।
लेबनान से सेना हटाने की भी मांग
हिजबुल्ला प्रमुख ने कहा कि किसी भी व्यापक समझौते के तहत इस्राइली सेना को लेबनान के विवादित और कब्जे वाले क्षेत्रों से वापस जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि पूर्ण युद्धविराम की मांग तभी पूरी मानी जाएगी जब सैन्य हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त हो।
डोनाल्ड ट्रंप और वॉशिंगटन को लेकर बयान
शेख नईम कासिम ने कहा कि अमेरिका यदि चाहे तो इस्राइल की सैन्य कार्रवाई पर प्रभावी रोक लगा सकता है। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व पर दबाव बनाने की जिम्मेदारी होने की बात कही और संकेत दिया कि वॉशिंगटन की नीति क्षेत्रीय हालात को प्रभावित कर सकती है।
पश्चिम एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया बयान ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में कई कूटनीतिक पहलें चल रही हैं। ऐसे में पूर्ण युद्धविराम की मांग आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं का महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।
क्या आसान होगी शांति की राह?
अमेरिका, ईरान, लेबनान और इस्राइल से जुड़े घटनाक्रमों के बीच शांति स्थापित करने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि हिजबुल्ला के ताजा रुख से स्पष्ट है कि संगठन अपनी शर्तों से पीछे हटने के मूड में नहीं है। ऐसे में पूर्ण युद्धविराम की मांग को लेकर भविष्य की वार्ताएं और भी अहम हो सकती हैं।
यह भी पढ़ें: यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
फुटपाथ का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया
Israel Iran Tension: लेबनान हमलों से बढ़ी नए युद्ध की आशंका
