केंद्र सरकार कम मात्रा में नशीले पदार्थों, ड्रग्स की निजी खपत को अपराध से मुक्त या डिक्रिमिनलाइज करने पर विचार कर रही है. खबर है कि बुधवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस बात पर शीर्ष सरकारी विभागों में आम सहमति बनी है. बता दें कि NDPS एक्ट की धारा 27 के तहत ड्रग्स के इस्तेमाल को दंडनीय अपराध माना जा सकता है. इसके तहत व्यक्ति पर 10 हजार रुपये का जुर्माना और 6 महीने की कैद या दोनों हो सकते हैं.एक रिपोर्ट के अनुसार, सभी हितधारक विभागों ने धारा 27 में संशोधन पर सहमति जताई है.साथ ही ये विभाग ड्रग्स के निजी इस्तेमाल पर कैद और जुर्माना राशि को भी खत्म करने की बात पर सहमत हुए हैं. ड्रग्स के इस्तेमाल से लोगों को बचाने के लिए 30 दिनों के पुनर्वास कार्यक्रम को भी शुरू किया जा सकता है. अधिनियम के तहत जमानत के प्रावधान भी काफी सख्त हैं.


रिपोर्ट के अनुसार, इस सप्ताह हुई बैठक में राजस्व विभाग, गृह मंत्रालय, नार्कोटिक्स ब्यूरो और स्वास्थ्य मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने सामाजिक न्याय विभाग और सशक्तिकरण विभाग के सुझावों पर सहमति जताई थी.सामाजिक न्याय विभाग ने कहा था कि ड्रग्स का इस्तेमाल करने वालों को ‘अपराधी’ के बजाए ‘पीड़ित’ की तरह देखा जाना चाहिए. साथ ही उन्हें पुनर्वास और नशामुक्ति कार्यक्रमों में भेजा जाना चाहिए. कहा जा रहा है कि आगामी कुछ दिनों पर इस मामले पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है. साथ ही आगामी संसद सत्र में भी संशोधन बिल पर चर्चा हो सकती है. राजस्व विभाग ने बीते महीने अधिनियम में संशोधन में बदलाव को लेकर दायर ड्राफ्ट को वापस ले लिया था. उस दौरान विभाग ने आगे की जांच का हवाला देते हुए यह फैसला लिया था.इसके बाद से ही कानून को लेकर उच्च-स्तरीय बैठकों का दौर जारी है. इसके अलावा अधिनियम में संशोधन के जरिए ड्रग जब्ती से जुड़े डेटा को पूरे देश में डिजिटाइज करने का भी सुझाव दिया गया है.
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