Raat Ko Sugar Chhodna के दौरान शाम को चीनी की जगह फल रखा हुआ

शहर हो या कस्बा, आजकल सेहत को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है. सोशल मीडिया पर लोग एक नया ट्रेंड अपना रहे हैं. शाम ढलते ही चीनी और मीठी चीजों से दूरी बनाना.

डॉक्टर और डाइटिशियन भी अक्सर यही सलाह देते हैं. रात के खाने के बाद मीठा खाने की आदत छोड़ना फायदेमंद हो सकता है. लेकिन असल में Raat Ko Sugar Chhodna शुरू करने पर शरीर में कैसे बदलाव आते हैं, यह जानना जरूरी है.

Raat Ko Sugar Chhodna का असर: शुरुआती जवाब

Raat Ko Sugar Chhodna शुरू करने के पहले कुछ दिनों में सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और मीठा खाने की तलब हो सकती है. However, यह असर अस्थायी होता है.

दूसरे हफ्ते तक ज्यादातर लोगों को नींद बेहतर होने, ऊर्जा स्थिर रहने और सुबह पेट हल्का महसूस होने जैसे बदलाव दिखने लगते हैं. यह असर हर व्यक्ति की डाइट और आदत के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.

2 हफ्ते का सफर: अहम बिंदु

  • पहले 3 से 5 दिन क्रेविंग और थकान महसूस हो सकती है.
  • रात में मीठा घटाने से नींद का पैटर्न सुधरने की संभावना बढ़ती है.
  • दूसरे हफ्ते तक ऊर्जा में उतार-चढ़ाव कम महसूस होता है.
  • यह बदलाव खानपान, नींद और तनाव जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है.
  • लंबे समय तक फायदे के लिए यह आदत लगातार बनाए रखना जरूरी है.

पहले 3 दिन: क्रेविंग और सिरदर्द की वजह

शरीर मीठे स्वाद का आदी होता है. So जब अचानक चीनी कम की जाती है, तो सिरदर्द और थकान जैसी दिक्कतें आम हैं. मूड में उतार-चढ़ाव भी महसूस हो सकता है.

एक स्वास्थ्य लेख के अनुसार, ऐसे लक्षण पहले हफ्ते में सबसे ज्यादा महसूस होते हैं. उसके बाद ये धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. Also, पानी पर्याप्त मात्रा में पीना इस दौर को आसान बना सकता है. नींद पूरी लेना भी मददगार होता है.

दिन 4 से 7: नींद और ऊर्जा में बदलाव

एक हफ्ते के बाद शरीर धीरे-धीरे ढलना शुरू करता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इस दौर में सिर भारी होने और थकान जैसी शिकायतें कम होने लगती हैं. स्वाद कलियां भी फल-सब्जियों की प्राकृतिक मिठास को बेहतर पहचानने लगती हैं.

Moreover, सोने से ठीक पहले मीठा खाने को लेकर एक अलग शोध कुछ और ही बताता है. रात में बार-बार मीठा खाने से नींद की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है. यह तब भी होता है जब एक बार का मीठा तुरंत नींद लाने में मदद करता दिखे. इसलिए रात की यह आदत छोड़ना नींद सुधारने में मददगार हो सकता है.

दूसरा हफ्ता: शुगर लेवल और मूड पर असर

दूसरे हफ्ते तक कई लोग बेहतर महसूस करने लगते हैं. एक स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार, इस समय तक धुंधलापन और सिर भारी होने जैसी शिकायतें कम हो जाती हैं. ऊर्जा ज्यादा स्थिर महसूस होती है और नींद भी बेहतर हो सकती है.

But यह दावा हर व्यक्ति पर एक जैसा लागू नहीं होता. यह उम्र, सेहत और बाकी खानपान पर भी निर्भर करता है.

एक क्लिनिकल ट्रायल की जानकारी बताती है कि शाम में बार-बार नाश्ता करने और मीठा खाने की आदत शरीर के वजन से जुड़ी हो सकती है. इसलिए शाम की यह आदत बदलना दीर्घकालिक फायदे भी दे सकता है.

कितनी चीनी सामान्य मानी जाती है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सलाह है कि रोजाना ली जाने वाली कुल ऊर्जा में मुक्त शुगर (free sugars) का हिस्सा 10 प्रतिशत से कम होना चाहिए. अतिरिक्त फायदे के लिए इसे 5 प्रतिशत तक घटाना बेहतर माना गया है.

Instead of पूरी तरह मीठा छोड़ने के, ज्यादातर विशेषज्ञ धीरे-धीरे मात्रा घटाने की सलाह देते हैं. यह सलाह खासकर मीठे पेय और प्रोसेस्ड मिठाइयों के लिए दी जाती है.

शुरुआत आसान बनाने के लिए छोटे कदम

  • रात के खाने के बाद मीठे की जगह फल का एक छोटा टुकड़ा लें.
  • चाय या कॉफी में चीनी की मात्रा धीरे-धीरे घटाएं.
  • सोने से 2 से 3 घंटे पहले भारी और मीठा खाना टालें.
  • पानी की मात्रा बढ़ाएं, क्योंकि प्यास को भी कई बार मीठे की तलब समझ लिया जाता है.
  • नींद का समय तय रखें, क्योंकि अच्छी नींद क्रेविंग को कम करने में मदद करती है.

सावधानी और किसे सतर्क रहना चाहिए

डायबिटीज, थायरॉइड या किसी अन्य पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोगों को अचानक डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर से बात करनी चाहिए. Finally, अगर सिरदर्द, कमजोरी या मूड स्विंग ज्यादा दिनों तक बना रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें और चिकित्सीय सलाह लें.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या 2 हफ्ते में वजन कम होगा? कुछ लोगों को हल्का वजन घटता दिख सकता है, लेकिन यह पूरी डाइट और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है. Overall, अकेले शाम की चीनी छोड़ने से गारंटीशुदा वजन घटाने का दावा नहीं किया जा सकता.

क्या फल खाना ठीक रहेगा? हां, फल में प्राकृतिक शुगर होती है और ज्यादातर सलाह इसे सीमित मात्रा में जारी रखने की होती है, बजाय पूरी तरह छोड़ने के.

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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