कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी प्रक्रिया को लेकर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश में मतदाता सूची से नाम काटे जा रहे हैं और यह काम सामान्य प्रक्रिया से नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर और तकनीकी माध्यमों से किया जा रहा है।

राहुल गांधी ने कहा कि इस पूरे मामले में दलित और OBC समुदाय के मतदाता सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए कहा, “भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को हाईजैक किया जा रहा है और यह किसी साधारण गलती का परिणाम नहीं, बल्कि संगठित प्रयास है।”

कर्नाटक से उठा मामला

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कर्नाटक के अलंद विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया। उनके अनुसार, वहां करीब 6,018 वोटर लिस्ट से नाम काटे गए। यह खुलासा तब हुआ जब बूथ लेवल अधिकारी ने पाया कि उसके ही चाचा का नाम सूची से गायब कर दिया गया है। जांच करने पर सामने आया कि आवेदन किसी पड़ोसी के नाम से दाखिल किया गया था, जबकि पड़ोसी को इसकी कोई जानकारी नहीं थी।

राहुल गांधी ने कहा, “यह स्पष्ट है कि यह काम किसी व्यक्ति ने नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर और केंद्रीकृत तंत्र के जरिए किया गया। यही वजह है कि कई मतदाताओं के नाम बिना उनकी जानकारी के हटा दिए गए।”

बाहर के मोबाइल नंबरों से दाखिल हुए आवेदन

कांग्रेस नेता ने बताया कि इन नामों को हटाने के लिए अलग-अलग राज्यों के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया। उन नंबरों से स्वतः आवेदन दाखिल हुए और कांग्रेस समर्थक वोटरों को सूची से बाहर कर दिया गया। उनका दावा है कि यह प्रक्रिया सिर्फ कर्नाटक तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य राज्यों में भी इसी तरह की घटनाएं हो सकती हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना

राहुल गांधी ने इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का दायित्व लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा करना है, लेकिन इसके बजाय वे उन ताकतों की मदद कर रहे हैं जिन्होंने लोकतंत्र को कमजोर किया और मतदाताओं के अधिकार छीने।

उन्होंने कहा, “भारतीय लोकतंत्र को बचाने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, लेकिन जब वही संस्था निष्पक्षता छोड़ दे तो यह देश के लिए खतरनाक संकेत है।”

राहुल गांधी की अपील

राहुल गांधी ने साफ किया कि वे कोई भी आरोप बिना प्रमाण के नहीं लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं यहां सिर्फ वही बातें रख रहा हूं जिनके ठोस सबूत मेरे पास हैं। मैं अपने देश, संविधान और लोकतंत्र से प्रेम करता हूं और इसी वजह से इस प्रक्रिया की रक्षा करना अपना कर्तव्य मानता हूं।”

राजनीतिक असर

विशेषज्ञ मानते हैं कि राहुल गांधी का यह आरोप आने वाले चुनावों की राजनीति को प्रभावित करेगा। विपक्ष पहले भी चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाता रहा है, लेकिन इस बार सॉफ्टवेयर आधारित धांधली और दलित-OBC मतदाताओं के निशाने पर होने की बात ने बहस को और तीखा बना दिया है।

कांग्रेस इसे अपने चुनाव अभियान में बड़ा मुद्दा बना सकती है, जबकि सत्तारूढ़ दल इस आरोप को खारिज कर सकता है। लेकिन एक बात साफ है कि इस विवाद ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गहरे प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।