Raipur Airport

रायपुर एयरपोर्ट भूमि विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। रायपुर के किसान अश्विनी बांधे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर 3500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। उनका दावा है कि एयरपोर्ट परिसर की 34.35 हेक्टेयर जमीन उनके पूर्वजों की थी। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में पुराने राजस्व रिकॉर्ड भी अदालत में प्रस्तुत किए हैं।

मुख्य अपडेट

  • सुप्रीम कोर्ट में मुआवजे की याचिका दाखिल।
  • 34.35 हेक्टेयर जमीन पर पुश्तैनी अधिकार का दावा।
  • 3500 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग।
  • पुराने राजस्व दस्तावेज कोर्ट में पेश।
  • सुनवाई के बाद आगे की स्थिति होगी स्पष्ट।

रायपुर एयरपोर्ट भूमि विवाद कैसे शुरू हुआ?

याचिकाकर्ता अश्विनी बांधे का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन ने उनके पूर्वजों की जमीन अस्थायी लीज पर ली थी। उस समय माना एयरफील्ड का निर्माण किया गया था। उनका दावा है कि युद्ध समाप्त होने के बाद जमीन लौटाने का आश्वासन दिया गया था।

हालांकि उनके अनुसार ऐसा नहीं हुआ। इसी कारण उन्होंने वर्षों बाद उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

पुराने दस्तावेजों को बनाया दावे का आधार

अश्विनी बांधे का कहना है कि वह करीब 35 वर्षों से इस मामले की कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई सरकारी विभागों और अदालतों के चक्कर लगाए।

उन्होंने बताया कि हाल ही में संस्कृति विभाग की प्रदर्शनी में उन्हें पुराने राजस्व रिकॉर्ड मिले। इनकी प्रमाणित प्रतियां अब सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की गई हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर रायपुर एयरपोर्ट भूमि विवाद में अपने अधिकार का दावा किया गया है।

मामले की अहम बातें

  • मामला स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट परिसर से जुड़ा है।
  • दावा 34.35 हेक्टेयर भूमि पर किया गया।
  • 1942 के भूमि अधिग्रहण का उल्लेख किया गया।
  • लगभग 20 करोड़ रुपये कानूनी प्रक्रिया में खर्च होने का दावा।
  • अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगा।

1942 के भूमि अधिग्रहण का क्या है दावा?

याचिका के अनुसार वर्ष 1942 में ब्रिटिश सरकार ने डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट के तहत माना एयरफील्ड के निर्माण के लिए कई गांवों की जमीन ली थी। इसमें बरौदा, रामचंडी और आसपास के क्षेत्रों का भी उल्लेख किया गया है।

किसान का दावा है कि उस समय केवल 1300 रुपये वार्षिक लीज राशि तय की गई थी। साथ ही युद्ध समाप्त होने के बाद भूमि वापस करने का आश्वासन भी दिया गया था।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई क्यों अहम है?

अब रायपुर एयरपोर्ट भूमि विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी। अदालत उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे का फैसला करेगी।

यदि अदालत याचिकाकर्ता के दावे को स्वीकार करती है, तो यह प्रदेश के सबसे चर्चित भूमि मामलों में शामिल हो सकता है। फिलहाल सभी की नजर आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।

यह भी पढ़ें: Delhi Riots Case: उमर खालिद जमानत पर आज आ सकता फैसला
PM Modi करेंगे राजस्थान रिफाइनरी उद्घाटन, जानिए खासियत
एकनाथ शिंदे हेल्थ अपडेट: अचानक बिगड़ी तबीयत के बाद अस्पताल में भर्ती