राजधानी रायपुर स्थित राजभवन के लोकभवन परिसर में छह राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों का स्थापना दिवस उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री रमेन डेका ने अपने संबोधन में कहा कि देश के सभी राज्यों की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान भले ही अलग हो, लेकिन उनकी आत्मा एक भारत की भावना से जुड़ी हुई है।

यह आयोजन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” पहल के अंतर्गत संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य देश की विविधताओं के बीच आपसी मेल-जोल और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ मंडपम में आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, झारखंड और नागालैंड के स्थापना दिवस एक साथ मनाए गए।

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि ऐसे आयोजन विभिन्न राज्यों की भाषाओं, लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक मूल्यों को जानने का मंच प्रदान करते हैं। इससे न केवल पारस्परिक सम्मान और सौहार्द बढ़ता है, बल्कि राष्ट्रीय एकता को भी मजबूती मिलती है। उन्होंने इस समारोह को देश की एकता को दर्शाने वाला गौरवशाली क्षण बताया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस किसी भी राज्य के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। यह दिन राज्य गठन की भावना, विकास की दिशा और जनआकांक्षाओं की पूर्ति का प्रतीक होता है। इन राज्यों का स्थापना दिवस उनके विकास पथ का उत्सव होने के साथ-साथ भारत की विविधता में निहित एकता को भी रेखांकित करता है।

राज्यपाल ने विभिन्न राज्यों की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से देश का महत्वपूर्ण राज्य है, जबकि पंजाब शौर्य, बलिदान और वैश्विक योगदान के लिए जाना जाता है। हरियाणा को उन्होंने भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं की आधारशिला बताया। झारखंड को खनिज संपदा से समृद्ध राज्य के रूप में उल्लेखित किया गया, वहीं चंडीगढ़ को देश का सुव्यवस्थित और आकर्षक केंद्रशासित प्रदेश बताया गया। नागालैंड की जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और लोगों की वीरता की भी उन्होंने सराहना की।

कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने अपनी संस्कृति, परंपराओं और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। साथ ही, विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने लोकनृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने सभी प्रतिनिधियों को राजकीय गमछा और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, अधिकारीगण, छात्राएं, महिलाएं तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।