राज्यसभा से 37 सदस्यों के रिटायरमेंट के अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने एक भावुक और प्रेरणादायक संबोधन दिया। उन्होंने रिटायर हो रहे सांसदों के योगदान को सराहते हुए कहा कि उनका अनुभव देश के लोकतंत्र को आगे भी दिशा देता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने राज्यसभा को “ओपन यूनिवर्सिटी” बताते हुए कहा कि यह ऐसा मंच है जहां हर दिन सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने नए सांसदों को सलाह दी कि वे वरिष्ठ नेताओं के अनुभवों से सीखें और संसदीय परंपराओं को समझें।

इस अवसर पर राज्यसभा के सभापति C. P. Radhakrishnan ने भी सभी रिटायर हो रहे सदस्यों के कार्यकाल और योगदान को विस्तार से रेखांकित किया।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सदन में विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा होती है, जहां हर सदस्य की भूमिका अहम होती है। कभी-कभी मतभेद और अलग-अलग अनुभव भी सामने आते हैं, लेकिन विदाई के समय सभी दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर एक-दूसरे के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजनीति में कभी “फुलस्टॉप” नहीं होता। कुछ सांसद भविष्य में फिर से सदन में लौट सकते हैं, जबकि अन्य अपने अनुभव का उपयोग सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में करेंगे। उनका योगदान हमेशा राष्ट्र के लिए मूल्यवान रहेगा।

प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ नेताओं जैसे H. D. Deve Gowda, Mallikarjun Kharge और Sharad Pawar का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक देश की सेवा की है। नए सांसदों को उनके अनुभव से प्रेरणा लेनी चाहिए और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाना चाहिए।

इसके साथ ही, उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति Harivansh Narayan Singh की कार्यशैली की भी सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने सदन की कार्यवाही को संतुलित और गरिमापूर्ण ढंग से संचालित किया है।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने संसद की गरिमा बनाए रखने, एक-दूसरे के अनुभवों का सम्मान करने और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुभवी नेताओं का मार्गदर्शन ही भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।