रायपुर। छत्तीसगढ़ की महिला सांसदों के साथ देश के सबसे बड़ी पंचायत में अप्रिय घटना घटित हुई। भाजपा इस मामले में महिला सांसदों पर ही मारपीट करने का आरोप लगा रही है। बीजेपी दस सेंकड के वीडियो के माध्यम से इस आरोप को साबित करने के प्रयास में लगे हैं। छत्तीसगढ़ की महिला आदिवासी सांसद फूलोदेवी नेताम एवं पिछड़ा वर्ग की महिला सांसद छाया वर्मा के साथ उच्च सदन में दुर्व्यवहार अक्षम्य है। महिलाओं के साथ इतना अत्याचार यदि देश में होता तो दलगत भावना को दरकिनार कर छत्तीसगढ़ और महिलाओं के हित में सोचने की आवश्यकता है।

महिलाओं के साथ हुए दुर्व्यवहार के खिलाफ पूरे छत्तीसगढ़ से आवाज उठनी चाहिए। भाजपा नेता छत्तीसगढ़ की बेटी दोनों राज्यसभा सदस्यों के साथ हुए दुर्व्यवहार के प्रति मुकदर्शक न बनें। राज्यसभा में दो महिला सांसदों के साथ पुरूष मार्शलों द्वारा किया गया कृत्य मोदी सरकार की मानसिकता को दिखाता है। छत्तीसगढ़ की महिला सांसदों का यह अपमान छत्तीसगढ़ के लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे।

राज्यसभा संसद का उच्च सदन है। ऐसा माना जाता है कि यहां बौद्धिक और अन्य प्रतिभा वाले लोगों को भेजा जाता है। वह देश के लोगों को गौरवान्वित करता है। केंद्र की मोदी सरकार ने राज्यसभा में महिला सांसदों के साथ जो दुर्व्यवहार और उसके बाद उन्हीं पर जो इल्जाम लगाए है, उससे भारत की गौरवशाली लोकतांत्रिक और संसदीय प्रणाली कलंकित हुई है। घटना के बाद जिस प्रकार से भाजपा का नेतृत्व और उनके नेता पीड़ित महिला सांसदों के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं वह निंदनीय है. ये उनके नारी विरोधी चरित्र को बताता है। मामले में शुरुआती 10 सेकंड का वीडियो जारी कर भाजपा इस पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है।

यह है घटना

बीमा बिल पेश होने के समय संसद में छत्तीसगढ़ की आदिवासी वर्ग की फूलोदेवी नेताम और पिछड़ा वर्ग की छाया वर्मा ने विरोध किया। विरोध के बाद जिस तरीके से भाजपा के पुरूष सांसदों और मार्शलों ने उन पर लात घूसे बरसाए, महिला सांसदों को धक्का देकर गिराया गया, वह बीजेपी की कथनी और करनी के बीच का फर्क बताता है। हंगामें के बीच सांसद फूलोदेवी नेताम नीचे गिर गईं जिससे उनके हाथ व पैर में मोच आ गई है।

आरएसएस पोषित मानसिकता

भाजपा के मातृ संगठन आरएसएस ने वर्षों तक महिलाओं को दूर रखा। आरएसएस में आज भी महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं है। उस आरएसएस की पोषित भाजपा की सरकार कैसे यह बर्दाश्त करे कि उसकी सरकार के खिलाफ दो ऐसी महिलाएं मुखर हो कर बोल रही हैं जो छत्तीसगढ़ जैसे दूरस्थ क्षेत्र के पिछड़े वर्ग और आदिवासी समाज से आती है। भाजपा अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को किसी भी स्तर तक जाकर कुचलना चाहती है।