भाई-बहनों के पवित्र प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन त्योहार को लेकर बाजारों में राखियों की दुकानें सज गई हैं। इसी कड़ी में बीजापुर जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाएं बांस और ताड़ की राखियां बना रही हैं। दुर्ग की उड़ान नई दिशा संस्था की महिलाएं गंगा, यमुना और महानदी की मिट्टी के अलावा गाय के गोबर, दूध, घी और गौमूत्र से अनोखी राखी तैयार की हैं। कोंडागांव की बिहान की स्वसहायता समूह की महिलाएं को हस्तशिल्प से जुड़कर विश्व प्रसिद्ध ढोकरा शिल्प कला की कलाकृतियों को राखी के रूप में संजोया है।

रक्षाबंधन त्योहार की महत्ता को देखते हुए बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लाक अंतर्गत कार्रमरका और बेलचर में सहायता समूह की महिलाएं बांस और ताड़ की राखियां बना रही हैं, जो काफी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। 16 प्रकार की बांस की इन राखियों के निर्माण में मोती, ऊन रत्न और आकर्षक धागों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भैरमगढ़ ब्लॉक के एक 12 महिला सदस्यों का स्व-सहायता समूह यह काम कर रहा है। आजीविका मिशन बिहान के तहत यह पूरा कार्य किया गया। सबसे बड़ी बात यह है कि इन राखियों का बाजारों में ज्यादा डिमांड है। बिहान मार्ट की ओर से इसे ज्यादा से ज्यादा प्रचारित और प्रसारित किया जा रहा है।

छह राज्यों मिट्टी की राखी की डिमांड

दुर्ग जिले में बीते करीब एक माह से उड़ान नई दिशा संस्था की महिलाएं इन दिनों अनोखी राखियां बनाने में जुटी हुई हैं। राखी में गंगा, यमुना और महानदी की मिट्टी के अलावा गाय के गोबर, दूध, घी और गौमूत्र से भी राखी बनाई जा रही है। अपने आप में यह राखी प्रवित्रता का प्रतीक साबित होगा। राखी में पूरी तरह छत्तीसगढ़ की संस्कृति की भी झलक दिखाई देगी। इसकी डिमांड केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि गुजरात, महाराष्ट्र, ओडि़शा, यूपी और हैदराबाद से भी आ रही है। भिलाई में बन रही इस राखी की डिमांड नवाबों के शहर लखनऊ से भी आई है। इसके लिए पांच राज्यों ने पहले सैंपल मंगाये थे। करीब 20 हजार से अधिक राखी के ऑर्डर उड़ान नई दिशा संस्था की महिलाएं पूरे कर रही हैं। संस्था की अध्यक्ष निधि चंद्राकर ने बताया कि संस्था को सबसे ज्यादा दिल्ली से 10 हजार राखी के ऑर्डर मिले थे, जो उन्हें भेजी जा चुकी है। अब इस राखी को ऑनलाइन भी बेचा जाएगा।

ढोकरा शिल्प की रक्षा राखी

कोंडागांव में ढोकरा शिल्प की राखी भाइर्यों की कलाईयों में सजेंगी। कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान की स्वसहायता समूह की महिलाओं को हस्तशिल्प से जुड़े विश्व प्रसिद्ध ढोकरा शिल्प कला की कलाकृतियों को नया आयाम दिया है। ग्राम किड़ई छेपड़ा की स्व-सहायता समूह की महिलाओं और हस्तशिल्पयों का ढोकरा राखियों के निर्माण का प्रशिक्षण कराया गया था। जिसमें पंखुड़ी सेवा समिति के द्वारा ढोकरा राखियों का प्रशिक्षण दिया गया था। ढोकरा राखियों में अनूठे डिजाइन की राखी बनाई गईं है। इन राखियों में मौली, रुद्राक्ष, मोती रत्न आदि का भी उपयोग किया गया है। जिसकी ब्रांडिंग रक्षा राखी के नाम से की जा रही है।