राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद कई अहम तथ्य उजागर हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार मंदिर में दान और चढ़ावे की गणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसका फायदा उठाकर चोरी और कथित गबन की घटनाएं हुईं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह केवल शुरुआती जांच है। विस्तृत जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट में प्रशासनिक जिम्मेदारियों और अन्य पहलुओं को विस्तार से रखा जाएगा।
CCTV फुटेज में दर्ज हुईं 70 चोरी की घटनाएं
SIT को उपलब्ध CCTV फुटेज की जांच में करीब 70 ऐसी घटनाएं मिलीं, जिनमें गणना कक्ष के कर्मचारियों द्वारा नोटों की गड्डियां और खुले नोट छिपाने जैसी गतिविधियां दिखाई दीं। जांच एजेंसी का कहना है कि 27 अप्रैल से पहले भी चोरी की घटनाएं होती रहीं, लेकिन उस समय का फुटेज उपलब्ध नहीं होने से नुकसान का सही अनुमान लगाना संभव नहीं हो पाया।
जांच में आरोपियों के बैंक खातों और उनके बयानों के आधार पर भी कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की बात कही गई है।
सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव बना चोरी का कारण
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच में सामने आया कि पहले गणना कक्ष में प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की अनिवार्य तलाशी का नियम था। बाद में जारी नई एसओपी में इसे नियमित या रैंडम जांच तक सीमित कर दिया गया।
इसके अलावा कर्मचारियों की निर्धारित वेशभूषा, निजी सामान पर रोक, गणना प्रक्रिया की सतत निगरानी और रिकॉर्डिंग जैसी कई व्यवस्थाओं का प्रभावी पालन नहीं किया गया। SIT ने इन कमियों को चोरी की प्रमुख वजह माना है।
किन लोगों की भूमिका पर उठे सवाल?
रिपोर्ट में ट्रस्ट प्रतिनिधि डॉ. अनिल मिश्रा की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं। जांच के अनुसार उन्हें गणना प्रक्रिया की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करनी थी, लेकिन इसमें कमी पाई गई।
वहीं गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं करने के लिए जिम्मेदार माना गया है। इसके अलावा रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार उनके पास विभिन्न हुंडियों की चाबियां थीं और उन्होंने कथित रूप से एक रिश्तेदार की नियुक्ति में भी सिफारिश की थी।
हालांकि रिपोर्ट में चंपत राय और गोपाल नगरकोटे का उल्लेख नहीं किया गया है। इस कारण उनके संबंध में आगे की जांच को लेकर चर्चा बनी हुई है।
बैंक और प्रशासनिक निगरानी पर भी उठे सवाल
SIT रिपोर्ट के अनुसार बैंक स्तर पर भी निर्धारित दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। कर्मचारियों को तय वेशभूषा उपलब्ध नहीं कराई गई और अधिकारियों के नियमित रोटेशन की व्यवस्था भी प्रभावी नहीं रही।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मंदिर जैसे संवेदनशील परिसर में केवल 45 दिनों तक CCTV फुटेज सुरक्षित रखना पर्याप्त नहीं था। ऑडिट में 180 दिनों तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सिफारिश पहले ही की जा चुकी थी, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया।
ट्रस्ट ने कहा- दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। ट्रस्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच का अनुरोध किए जाने के बाद उच्चस्तरीय SIT का गठन किया गया था।
ट्रस्ट का कहना है कि जांच केवल दोषियों की पहचान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में चढ़ावा गणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए भी आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे।
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